Legal Rights of Men in Self Defence: समाज में अक्सर यह धारणा बनी रहती है कि घरेलू हिंसा या मारपीट के मामलों में हमेशा पुरुष ही दोषी होता है. लेकिन कई बार ऐसी घटनाएं भी सामने आती हैं, जब किसी विवाद या झगड़े में महिला पुरुष पर हाथ उठा देती है. ऐसे मामलों में सवाल उठता है कि क्या पुरुष को आत्मरक्षा (सेल्फ डिफेंस) का कानूनी अधिकार है? भारतीय कानून इस मुद्दे पर क्या कहता है, यह जानना जरूरी है.
भारतीय न्याय संहिता में आत्मरक्षा का प्रावधान
भारतीय न्याय संहिता (BNS) में हर नागरिक को आत्मरक्षा का अधिकार दिया गया है. कानून के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की जान, शरीर या संपत्ति पर खतरा हो, तो वह अपनी रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा सकता है. यह अधिकार केवल पुरुषों या महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति को समान रूप से प्राप्त है. इसका मतलब है कि अगर किसी महिला द्वारा पुरुष पर शारीरिक हमला किया जाता है, तो पुरुष भी अपनी सुरक्षा के लिए उचित बल का प्रयोग कर सकता है. भारतीय कानून हर नागरिक को यह अधिकार देता है कि वह अपने या किसी अन्य व्यक्ति के शरीर और संपत्ति की रक्षा के लिए आवश्यक बल का प्रयोग कर सके.
कब माना जाएगा आत्मरक्षा का अधिकार?
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, आत्मरक्षा का अधिकार तभी मान्य होता है जब सामने से वास्तविक खतरा हो. यानी यदि कोई महिला पुरुष पर हमला करती है और पुरुष केवल खुद को बचाने के लिए प्रतिक्रिया देता है, तो इसे अपराध नहीं माना जाएगा. हालांकि, इस दौरान यह ध्यान रखना जरूरी है कि आत्मरक्षा में किया गया प्रतिकार जरूरत से ज्यादा हिंसक न हो. यदि बचाव के नाम पर अत्यधिक चोट पहुंचाई जाती है, तो यह कानूनन गलत माना जा सकता है.
BNS की धाराओं में क्या है प्रावधान?
भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 34 से 44 तक आत्मरक्षा के अधिकार को स्पष्ट करती हैं. इन धाराओं के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी सुरक्षा के लिए तत्काल प्रतिक्रिया देता है, तो उसे अपराध नहीं माना जाता. उदाहरण के तौर पर, यदि कोई महिला थप्पड़ मारती है और पुरुष खुद को बचाने के लिए उसका हाथ पकड़ लेता है या उसे पीछे धकेल देता है, तो यह आत्मरक्षा की श्रेणी में आ सकता है.
महिला की गरिमा और लज्जा का रखना होगा ध्यान
महिला से हाथापाई की स्थिति में यह विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी तरह की हरकत से उसकी गरिमा या लज्जा को ठेस न पहुंचे. यदि आत्मरक्षा के नाम पर महिला के कपड़े खींचना, उसे अपमानित करना या उसकी मर्यादा भंग करना जैसी स्थिति पैदा होती है, तो यह कानूनन अपराध की श्रेणी में आ सकता है. ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति पर अलग से कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.
गाली-गलौज भी बन सकती है कानूनी समस्या
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि महिला के साथ झगड़े या हाथापाई के दौरान गाली-गलौज करना गंभीर कानूनी समस्या पैदा कर सकता है. भारतीय कानून में किसी महिला का अपमान करने, उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने या अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करने को अपराध माना गया है.
सबूत और परिस्थितियां तय करती हैं मामला
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि ऐसे मामलों में कानूनी स्थिति अक्सर परिस्थितियों और सबूतों पर निर्भर करती है. इसलिए यदि किसी पुरुष के साथ महिला द्वारा मारपीट होती है, तो उसे पुलिस में शिकायत दर्ज कराने और कानूनी प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है.
हिंसा से बेहतर है कानूनी और शांतिपूर्ण समाधान
कुल मिलाकर भारतीय कानून आत्मरक्षा का अधिकार सभी नागरिकों को समान रूप से देता है. चाहे पुरुष हो या महिला, किसी भी प्रकार के हमले की स्थिति में व्यक्ति अपनी सुरक्षा के लिए उचित कदम उठा सकता है. लेकिन सबसे बेहतर रास्ता यही है कि विवाद को हिंसा की बजाय बातचीत और कानूनी तरीके से सुलझाया जाए.
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