Friday, March 6, 2026
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बिहार बंद: पीएम के खिलाफ अभद्र टिप्पणी पर एनडीए का आक्रोश, पटना समेत कई जिलों में दिखा असर

Bihar Band: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर बिहार की राजनीति में बवाल मचा हुआ है. इसी मुद्दे पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने 4 सितंबर को बिहार बंद का आह्वान किया, जिसका असर राजधानी पटना समेत पूरे प्रदेश में साफ तौर पर देखने को मिला. सुबह से ही एनडीए कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और जोरदार नारेबाजी के साथ विरोध मार्च निकाला.

पटना के डाकबंगला चौराहा, फ्रेजर रोड, बोरिंग रोड और गांधी मैदान जैसे व्यस्त इलाकों में बंद का व्यापक असर दिखाई दिया. बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा और ज्यादातर दुकानें बंद रहीं. परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हुई. ऑटो, ई-रिक्शा और निजी वाहन सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम नजर आए. यात्रियों को बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर परेशानी का सामना करना पड़ा.

बंद का असर पटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर, भोजपुर, नवादा और सहरसा जैसे जिलों में भी बाजार बंद रहे. कई जगहों पर एनडीए कार्यकर्ताओं ने सड़क पर टायर जलाकर प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री व उनकी मां के खिलाफ की गई टिप्पणी पर आक्रोश व्यक्त किया. हालांकि प्रशासन की सतर्कता और भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण किसी बड़े उपद्रव की खबर नहीं मिली.

जरूरी सेवाओं को इस बंद से मुक्त रखा गया. अस्पताल, दवा दुकानें और दूध की आपूर्ति सामान्य रूप से चालू रही. लेकिन स्कूल-कॉलेजों में उपस्थिति कम रही और कई निजी कार्यालय बंद रहे.

एनडीए नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री की मां के खिलाफ गाली-गलौज न केवल व्यक्तिगत हमला है, बल्कि पूरे देश की संस्कृति और मर्यादा का अपमान है. जनता ने बंद को सफल बनाकर इस बात का स्पष्ट संदेश दिया है कि वह ऐसे बयानों को कतई स्वीकार नहीं करेगी. दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इस बंद को राजनीति से प्रेरित करार दिया और कहा कि एनडीए जनता को असली मुद्दों से भटकाने का काम कर रहा है.

कुल मिलाकर, 4 सितंबर का यह बंद बिहार की राजनीति में बड़ा संदेश छोड़ गया. पटना से लेकर अन्य जिलों तक जनता की भागीदारी ने दिखा दिया कि प्रधानमंत्री की मां पर की गई अभद्र टिप्पणी राज्य की राजनीति में आने वाले दिनों तक गूंजती रहेगी.

यह भी पढ़ें- बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ कितनी सफल रही? जानें सत्तापक्ष और विपक्ष का नजरिया

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