Holi Festival Travel Rush: होली का त्योहार नजदीक आते ही बिहार लौटने वाले प्रवासी मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों की मुश्किलें फिर सामने आ गई हैं. देश के अलग-अलग शहरों- दिल्ली, मुंबई, सूरत, पंजाब और बेंगलुरु से बिहार आने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ उमड़ रही है. हालत यह है कि एक सीट पर सात से आठ यात्री बैठकर सफर कर रहे हैं, जबकि कई लोग ट्रेन के टॉयलेट के पास या भीतर बैठकर यात्रा करने को मजबूर हैं.
होली के अवसर पर हर साल यह स्थिति बनती है, लेकिन इस बार भीड़ पिछले वर्षों की तुलना में अधिक बताई जा रही है. कन्फर्म टिकट मिलना लगभग असंभव हो गया है. वेटिंग लिस्ट सैकड़ों में पहुंच चुकी है. ऐसे में लोग जनरल डिब्बों में किसी तरह जगह बनाकर घर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. कई यात्रियों का कहना है कि उन्होंने 24 से 36 घंटे तक खड़े होकर सफर किया.
रेलवे प्रशासन ने अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है, लेकिन यात्रियों का कहना है कि यह व्यवस्था भी भीड़ के आगे नाकाफी साबित हो रही है. प्लेटफॉर्म पर पैर रखने की जगह नहीं है. छोटे बच्चों और महिलाओं के साथ यात्रा कर रहे परिवारों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. पानी, शौचालय और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी भीड़ के कारण प्रभावित हो रही हैं.
यात्रियों का कहना है कि त्योहार पर घर पहुंचना उनकी भावनाओं से जुड़ा होता है. सालभर परिवार से दूर रहने के बाद होली पर घर जाने की चाह उन्हें हर मुश्किल झेलने को मजबूर कर देती है. कई लोग महंगे टिकट लेकर प्राइवेट बसों का सहारा ले रहे हैं, लेकिन वहां भी किराया दोगुना-तिगुना वसूला जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे राज्यों से बड़े पैमाने पर होने वाले पलायन को देखते हुए त्योहारों के समय पहले से व्यापक योजना बनानी चाहिए. अतिरिक्त कोच, लंबी दूरी की स्पेशल ट्रेनें और बेहतर भीड़ प्रबंधन की जरूरत है, ताकि यात्रियों को इंसानियत भरी यात्रा का अनुभव मिल सके. होली खुशियों का त्योहार है, लेकिन घर लौटने की यह जद्दोजहद कई यात्रियों के लिए परीक्षा से कम नहीं है.
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