Friday, March 6, 2026
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मकर संक्रांति पर तेज प्रताप के घर पहुंचे लालू, तेजस्वी को मिला RJD के विलय का ऑफर

Bihar Politics: मकर संक्रांति 2026 के मौके पर बिहार की राजनीति में एक बार फिर पारिवारिक मुलाकात ने सियासी हलचल तेज कर दी. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर्व के दिन अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के आवास पहुंचे. दही-चूड़ा और तिलकुट के साथ मनाए गए इस पारंपरिक त्योहार के दौरान हुई बातचीत सिर्फ पारिवारिक नहीं रही, बल्कि उसमें भविष्य की राजनीति के संकेत भी छिपे रहे. इसी मौके पर तेज प्रताप यादव ने अपने छोटे भाई और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को JJD में RJD के “विलय” का ऑफर देकर सबका ध्यान खींच लिया.

तेज प्रताप यादव ने मकर संक्रांति को नई शुरुआत और एकता का पर्व बताते हुए कहा कि यह समय पार्टी को और ज्यादा मजबूत करने का है. उनके अनुसार, RJD को आंतरिक मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट संगठन के रूप में आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने इशारों में कहा कि संगठनात्मक विलय जैसे कदम से कार्यकर्ताओं में स्पष्ट संदेश जाएगा और पार्टी की चुनावी तैयारी को भी धार मिलेगी.

लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी ने इस बयान को और अहम बना दिया. माना जा रहा है कि लालू परिवार और पार्टी दोनों स्तर पर एकजुटता का संदेश देना चाहते हैं. हालांकि, लालू ने सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उनका तेज प्रताप के घर पहुंचना और पारिवारिक सौहार्द दिखाना अपने आप में राजनीतिक संकेत माना जा रहा है.

तेजस्वी यादव की ओर से भी इस ऑफर पर कोई सीधी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. RJD के करीबी नेताओं का कहना है कि पार्टी में नेतृत्व को लेकर कोई भ्रम नहीं है और तेजस्वी पूरी मजबूती से संगठन का नेतृत्व कर रहे हैं. उनके मुताबिक, तेज प्रताप का बयान पार्टी को जोड़ने और सकारात्मक राजनीति को बढ़ावा देने की मंशा से दिया गया है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मकर संक्रांति 2026 पर सामने आया यह घटनाक्रम सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं है. इसका असर RJD की आंतरिक राजनीति और महागठबंधन की रणनीति पर भी पड़ सकता है. खासकर तब, जब आने वाले समय में चुनावी तैयारियों को लेकर गतिविधियां तेज होने वाली हैं.

कुल मिलाकर, मकर संक्रांति 2026 पर लालू प्रसाद यादव का तेज प्रताप के घर पहुंचना और तेजस्वी को दिया गया RJD के विलय का ऑफर बिहार की राजनीति में एक नए सियासी संदेश के रूप में देखा जा रहा है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह पहल सिर्फ प्रतीकात्मक थी या किसी बड़े राजनीतिक फैसले की भूमिका.

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