India Power Today: भारत की राजनीति और कूटनीति में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. जिस तरह से देश ने वैश्विक मंच पर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है, उसका असर अब आम लोगों की सोच पर भी साफ दिखाई देता है. पहले जहां भारत की तुलना में पाकिस्तान को लेकर हमेशा सुरक्षा का डर महसूस किया जाता था, वहीं अब हालात ऐसे हैं कि लोग खुलेआम कह रहे हैं कि पाकिस्तान तो बहुत पीछे छूट चुका है और आज अमेरिका जैसे महाशक्ति संपन्न देश की भी भारत के सामने स्थिति कमजोर लगती है.
दरअसल, बीते दशक में भारत ने रक्षा, तकनीक, अंतरिक्ष और कूटनीतिक मोर्चे पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के जरिए रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दिया. आज भारत न केवल अपने लिए आधुनिक हथियार बना रहा है, बल्कि कई देशों को रक्षा उपकरण निर्यात भी कर रहा है. यही कारण है कि आम जनता के बीच यह आत्मविश्वास पैदा हुआ है कि भारत किसी भी चुनौती का डटकर सामना कर सकता है.
पाकिस्तान की स्थिति आज बेहद नाजुक है. उसकी अर्थव्यवस्था कर्ज और महंगाई के बोझ तले दबी हुई है. वहां की राजनीतिक अस्थिरता और आतंकी संगठनों पर ढ़ीली पकड़ ने उसकी अंतर्राष्ट्रीय छवि को भी कमजोर कर दिया है. यही वजह है कि भारतीय नागरिकों के बीच अब पाकिस्तान को लेकर वह भय नहीं रहा, जो पहले कभी महसूस होता था. लोग कहते हैं कि अब पाकिस्तान हमें चुनौती देने की स्थिति में ही नहीं है.
दूसरी ओर, अमेरिका जो कभी दुनिया की एकमात्र महाशक्ति माना जाता था, उसकी नीतियां और वैश्विक प्रभाव भी कमजोर पड़ते दिख रहे हैं. अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी और यूक्रेन-रूस युद्ध जैसे मसलों पर उसकी सीमित भूमिका ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अमेरिका अब वैसा प्रभावशाली देश नहीं रहा, जैसा कभी हुआ करता था. भारत-अमेरिका रिश्तों में भी अब बराबरी का स्वर नजर आता है. जी20 शिखर सम्मेलन और ब्रिक्स विस्तार में भारत की भूमिका ने इसे और मजबूत किया है.
आज भारत की जनता का आत्मविश्वास इस बात से झलकता है कि वह कह रही है- “पहले पाकिस्तान से भी डर लगता था, अब अमेरिका भी मजाक लगता है.” यह बयान सिर्फ मजाक नहीं, बल्कि उस नई ताकत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, जिसे भारत ने अपनी मेहनत, तकनीक और कूटनीति से हासिल किया है. साफ है कि अब भारत केवल एक उभरती शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने वाला देश बन चुका है.
डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में दरार की आशंका जताई जा रही थी. लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं और टैरिफ को लेकर दोनों देशों के बीच सुलह होने की संभावना जताई जा रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना मित्र और एक महान नेता बताया है.
ट्रंप और नरेंद्र मोदी की दोस्ती हमेशा से चर्चा में रही है. हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ (आयात शुल्क) बढ़ाने के बावजूद अपने पुराने रिश्तों का जिक्र किया. ट्रंप ने कहा, “भारत से मेरी पुरानी और गहरी दोस्ती है.” इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और ट्रंप को धन्यवाद कहा.
दरअसल, ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका ने भारत से आने वाले कुछ उत्पादों पर शुल्क बढ़ाया था. उस समय यह कदम व्यापारिक दृष्टि से सख्त माना गया था. हालांकि इसके बावजूद दोनों नेताओं के व्यक्तिगत रिश्ते मधुर बने रहे. ट्रंप ने कई मौकों पर मोदी को “ट्रू फ्रेंड” और “ग्रेट लीडर” कहकर संबोधित किया था.
प्रधानमंत्री मोदी ने भी हमेशा इस दोस्ती का सम्मान किया. जब ट्रंप ने भारत यात्रा की थी, तो अहमदाबाद के ‘नमस्ते ट्रंप’ कार्यक्रम ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था. वहीं अमेरिका में ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में ट्रंप ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए मोदी की लोकप्रियता की तारीफ की थी.
अब जब ट्रंप ने फिर से अपने पुराने रिश्तों को याद किया और भारत को ‘स्पेशल पार्टनर’ बताया, तो मोदी ने उनका आभार जताते हुए कहा- “थैंक यू, डोनाल्ड ट्रंप. भारत-अमेरिका दोस्ती हमेशा और मजबूत होती रहेगी.”
इस बयानबाजी से साफ है कि भले ही व्यापारिक मतभेद समय-समय पर सामने आते हों, लेकिन दोनों देशों के रिश्ते मजबूत नींव पर खड़े हैं. मोदी और ट्रंप की व्यक्तिगत बॉन्डिंग ने इस रिश्ते को और ऊंचाई दी है. कूटनीतिक हलकों का मानना है कि भविष्य में चाहे अमेरिका में कोई भी राष्ट्रपति हो, भारत-अमेरिका साझेदारी वैश्विक राजनीति में अहम भूमिका निभाती रहेगी.
यह भी पढ़ें- 22 सितंबर से सस्ता होगा बाजार: दूध, दवाइयों, एसी-टीवी और गाड़ियों पर घटा जीएसटी



