Monday, March 16, 2026
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गैस एजेंसियों का खेल: SMS कहता है सिलेंडर पहुंच गया, उपभोक्ता पूछे- आया कब?

LPG Cylinder Delivery Scam: देश में इन दिनों गैस सिलेंडर की ऐसी अद्भुत लीला चल रही है कि अगर इसे कोई जादूगर देख ले तो वह भी अपने पेशे पर पुनर्विचार कर ले. उपभोक्ता बड़े प्यार से गैस सिलेंडर बुक करते हैं, DAC भी मिल जाता है, उम्मीद भी जग जाती है कि अब रसोई में आग जलेगी. लेकिन डिलीवरी की तारीख आते-आते सिलेंडर ऐसे गायब होता है जैसे राजनीति में ईमानदारी.

SMS का कमाल: सिस्टम कहता है डिलीवरी हो गई
सबसे मजेदार बात यह है कि बुकिंग के कुछ दिनों बाद मोबाइल पर एक गर्वभरा SMS आ जाता है- “आपके सिलेंडर की डिलीवरी सफलतापूर्वक हो चुकी है.” अब उपभोक्ता सोच में पड़ जाता है कि यह डिलीवरी आखिर हुई कहां? घर में तो नहीं आई, गली में भी नहीं दिखी, पड़ोसी के यहां भी नहीं. संभव है कि सिलेंडर ने आत्मनिर्भर बनकर खुद ही किसी होटल या ढ़ाबे में नौकरी पकड़ ली हो.

कालाबाजारी करने वालों को नहीं रहा कानून का डर
असल में यह पूरा खेल कालाबाजारी का है. गैस एजेंसी के कुछ संचालक और उनके वेंडर ऐसे बेखौफ घूम रहे हैं जैसे उन्हें किसी कानून, नियम या प्रशासन से कोई डर ही नहीं. आम उपभोक्ता के हिस्से का सिलेंडर शायद सीधे उन जगहों पर पहुंच रहा है जहां दाम थोड़ा ज्यादा मिल जाता है. जनता लाइन में खड़ी है और सिलेंडर बाजार में.

शिकायत प्रणाली भी ‘गायब’, कॉल और ऑनलाइन सेवा ठप
अब अगर कोई उपभोक्ता हिम्मत करके शिकायत करने की कोशिश करे तो असली मनोरंजन वहीं शुरू होता है. फोन मिलाइए तो कॉल या तो लगती नहीं, लग जाए तो उठती नहीं और अगर उठ भी जाए तो जवाब ऐसा मिलता है कि लगे आप ही गलती से सिलेंडर मांग बैठे. ऑनलाइन शिकायत करने की कोशिश करें तो वेबसाइट और ऐप ऐसे व्यवहार करते हैं जैसे उन्हें भी गैस की कमी हो गई हो.

शिकायत प्रणाली की हालत ऐसी हो गई है कि लगता है इसे भी सिलेंडर के साथ ही कहीं “डिलीवर” कर दिया गया है. जनता शिकायत करना चाहती है, लेकिन सिस्टम कहता है- “कृपया प्रतीक्षा करें”, और यह प्रतीक्षा इतनी लंबी है कि अगली बुकिंग की तारीख भी आ जाती है.

सोशल मीडिया बना जनता का नया शिकायत केंद्र
सोशल मीडिया पर लोग गुस्सा निकाल रहे हैं. विडंबना यह है कि देश डिजिटल हो गया, बुकिंग ऑनलाइन हो गई, मैसेज तुरंत आ जाता है, लेकिन सिलेंडर अभी भी रास्ते में ही कहीं “विकसित” हो रहा है.

अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में रसोई गैस नहीं, बल्कि “कल्पना गैस” से खाना पकाना पड़ेगा, क्योंकि सिस्टम कहेगा कि सिलेंडर पहुंच गया है और जनता कहेगी कि शायद रास्ते में ही लोकतंत्र की तरह गायब हो गया.

यह भी पढ़ें- जनता के चूल्हे ठंडे, नेताजी का गोदाम गर्म! हापुड़ में सपा लीडर के घर से 55 गैस सिलेंडर बरामद

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