Loan EMI: भारत में कर्ज या आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या करना अब कोई बड़ी बात नहीं मानी जाती है. देश के कई राज्यों में ऐसी घटनाएं सामने आते रहती हैं, जहां कर्ज के बोझ से दबे लोगों ने आत्महत्या की है. यदि आप अपने लोन की ईएमआई चुकाने में असमर्थ हैं, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है. इस स्थिति में आपके पास कुछ अधिकार और विकल्प उपलब्ध हैं, जिनके बारे में जानना महत्वपूर्ण है.
बैंक से संवाद करें: सबसे पहले, अपने बैंक या वित्तीय संस्थान से तुरंत संपर्क करें और अपनी वर्तमान वित्तीय स्थिति के बारे में उन्हें सूचित करें. बैंक आपकी स्थिति को समझते हुए लोन पुनर्गठन (रीस्ट्रक्चरिंग) या ईएमआई में अस्थायी राहत जैसे विकल्प प्रदान कर सकता है.
ऋण पुनर्गठन का अनुरोध करें: यदि आप लोन की मौजूदा शर्तों के अनुसार भुगतान करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, तो आप लोन की अवधि बढ़ाने या ईएमआई राशि कम करने के लिए ऋण पुनर्गठन का अनुरोध कर सकते हैं. हालांकि, इससे कुल ब्याज राशि बढ़ सकती है, लेकिन मासिक बोझ कम हो जाएगा.
अपने अधिकारों की जानकारी रखें: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि आप लगातार तीन महीनों तक ईएमआई का भुगतान नहीं करते हैं, तो बैंक आपको डिफॉल्टर घोषित कर सकता है. लेकिन इससे पहले, बैंक को आपको नोटिस भेजना आवश्यक है.

क्रेडिट स्कोर पर प्रभाव: समय पर ईएमआई न चुकाने से आपका क्रेडिट स्कोर प्रभावित हो सकता है, जिससे भविष्य में लोन प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है. इसलिए, अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार होते ही बकाया राशि का भुगतान करने का प्रयास करें.
वित्तीय परामर्श लें: यदि आप लोन चुकाने में गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, तो किसी वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें. वे आपको बजट प्रबंधन, खर्चों में कटौती और आय बढ़ाने के तरीकों पर मार्गदर्शन दे सकते हैं.
आरबीआई ने लोन वसूली की प्रक्रिया को पारदर्शी, न्यायसंगत और उधारकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने के उद्देश्य से कई दिशानिर्देश तय किए हैं. इन दिशानिर्देशों का पालन सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए अनिवार्य है.
लोन वसूली के लिए ये है आरबीआई की गाइडलाइन
निष्पक्ष वसूली प्रक्रिया: RBI के अनुसार, लोन वसूली एजेंटों को उधारकर्ताओं के साथ शालीनता के साथ और सम्मानपूर्वक व्यवहार करना चाहिए. उन्हें किसी भी प्रकार की जबरदस्ती, धमकी या अपमानजनक भाषा का उपयोग करने की अनुमति नहीं है. वसूली एजेंटों को सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही उधारकर्ताओं से संपर्क करना चाहिए. रिकवरी एजेंट को उधारकर्ता से सार्वजनिक अवकाश (Public Holiday) के दिन संपर्क करने की अनुमति नहीं है.
गोपनीयता और निजता की सुरक्षा: उधारकर्ताओं की व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी की गोपनीयता बनाए रखना बैंकों और वसूली एजेंटों की जिम्मेदारी है. उन्हें उधारकर्ता की सहमति के बिना किसी तीसरे पक्ष के साथ ऋण संबंधी जानकारी साझा करने की अनुमति नहीं है. यदि रिकवरी एजेंट ऐसा करता है तो इसे अनुचित व्यवहार माना जाएगा और उधारकर्ता को उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार है.
रिकवरी एजेंटों की नियुक्ति और प्रशिक्षण: बैंक और वित्तीय संस्थान को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके रिकवरी एजेंट उचित रूप से प्रशिक्षित हों और RBI के दिशानिर्देशों का पालन करें. एजेंटों को उधारकर्ताओं से संपर्क करते समय अपनी पहचान प्रस्तुत करनी चाहिए, जिसमें आईडी कार्ड और प्राधिकरण पत्र शामिल हैं.
शिकायत निवारण प्रणाली: यदि उधारकर्ता को वसूली प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा या उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, तो वे संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था में शिकायत दर्ज करा सकते हैं. बैंक को इन शिकायतों का त्वरित और प्रभावी समाधान करना आवश्यक है.
कानूनी कार्रवाई और उधारकर्ता के अधिकार: यदि उधारकर्ता लोन चुकाने में असमर्थ है, तो बैंक को पहले उसे नोटिस भेजना आवश्यक है. इसके बाद भी यदि भुगतान नहीं होता है, तो बैंक कानूनी कार्रवाई कर सकता है, लेकिन इस प्रक्रिया में उधारकर्ता के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए.

इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य लोन वसूली प्रक्रिया को नैतिक, पारदर्शी और उधारकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने वाला बनाना है. यदि आपको लोन वसूली से संबंधित कोई समस्या या उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, तो आप अपने बैंक की शिकायत निवारण प्रणाली या RBI से संपर्क कर सकते हैं.
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