Global Internet Outage Risk: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चिंता का केंद्र बनता जा रहा है. अब तक दुनिया ईरान को तेल और गैस आपूर्ति के संदर्भ में एक अहम खिलाड़ी के रूप में देखती रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास एक और ऐसा हथियार है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर सकता है- इंटरनेट कनेक्टिविटी पर असर डालने की क्षमता.
दरअसल, दुनिया का बड़ा हिस्सा समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबल्स पर निर्भर करता है, जो एशिया, यूरोप और अफ्रीका को जोड़ती हैं. इनमें से कई महत्वपूर्ण केबल्स मध्य-पूर्व के समुद्री रास्तों से होकर गुजरती हैं, जहां ईरान का भौगोलिक प्रभाव मजबूत है. यदि किसी तनावपूर्ण स्थिति में ईरान इन केबल्स को नुकसान पहुंचाता है या उनकी सुरक्षा को प्रभावित करता है, तो इंटरनेट सेवाएं बड़े पैमाने पर बाधित हो सकती हैं.
इसका सीधा असर सिर्फ पश्चिमी देशों पर ही नहीं, बल्कि भारत जैसे तेजी से डिजिटल हो रहे देशों पर भी पड़ेगा. भारत में बैंकिंग, ई-कॉमर्स, डिजिटल पेमेंट, ईमेल, वीडियो कॉल, आईटी और एआई सेवाएं बड़े पैमाने पर इंटरनेट पर निर्भर हैं. ऐसे में, अगर अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक धीमा पड़ता है या बाधित होता है, तो इसका असर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर साफ दिखाई देगा.
विशेषज्ञ बताते हैं कि आज की दुनिया में ‘डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर’ उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है, जितना तेल और गैस. अगर इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रभावित होती है, तो शेयर बाजार से लेकर एयरलाइंस, अस्पतालों से लेकर सरकारी सेवाओं तक सब कुछ प्रभावित हो सकता है. कोविड-19 के बाद जिस तरह डिजिटल सेवाओं पर निर्भरता बढ़ी है, वह इस खतरे को और गंभीर बना देती है.
हालांकि, यह भी सच है कि किसी देश द्वारा जानबूझकर इंटरनेट केबल्स को नुकसान पहुंचाना एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन सकता है और इसके गंभीर कूटनीतिक परिणाम हो सकते हैं. लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात में इस तरह की आशंकाओं को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता.
भारत समेत कई देश अब वैकल्पिक रूट्स, सैटेलाइट इंटरनेट और डेटा सुरक्षा के अन्य उपायों पर काम कर रहे हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में नुकसान को कम किया जा सके. फिरभी, यह स्पष्ट है कि भविष्य की लड़ाइयां सिर्फ जमीन या तेल तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि डिजिटल दुनिया भी इसका अहम मोर्चा बनेगी.
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