Independence Day 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की जमकर सराहना की. उन्होंने इसे दुनिया का सबसे बड़ा गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) बताते हुए कहा कि संघ ने पिछले 100 वर्षों से गौरवपूर्ण तरीके से राष्ट्र की सेवा की है.
प्रधानमंत्री के इन शब्दों के पीछे वह लंबा इतिहास है, जो संघ की सेवा भावना को दर्शाता है. यह संगठन आपदा और संकट के समय हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़ा रहा और देश का मान बढ़ाया. यह पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी ने खुले दिल से संघ की प्रशंसा की हो.
इसी साल मार्च में अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन के साथ एक साक्षात्कार में पीएम मोदी ने अपने जीवन पर आरएसएस के प्रभाव का जिक्र किया था. उन्होंने बचपन में संघ के साथ जुड़ाव, झुग्गी-बस्तियों में सेवा कार्य, आदिवासी कल्याण और लाखों बच्चों को सस्ती शिक्षा उपलब्ध कराने जैसे प्रयासों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि सेवा भारती जैसे संगठन बिना किसी सरकारी सहायता के देशभर में 1,25,000 से अधिक सेवा प्रकल्प चला रहे हैं.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 27 सितंबर 1925 को विजयादशमी के दिन नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी. स्वतंत्रता से पहले के कठिन समय में उन्होंने समाज को एकजुट करने और राष्ट्रीय गौरव को पुनर्स्थापित करने का संकल्प लिया. स्वामी विवेकानंद, लोकमान्य तिलक और महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने ऐसा संगठन बनाया जो राष्ट्र निर्माण और हिंदू समाज को संगठित करने के लिए कार्यरत है.
पिछले 100 वर्षों में आरएसएस ने सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, श्रम और विकास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है. देशभर में इसकी 57,000 से अधिक शाखाएं सक्रिय हैं. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस), विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और विद्या भारती जैसे संगठन संघ की प्रेरणा से बने, जिन्होंने शिक्षा, श्रम अधिकार और सामाजिक एकता में अहम बदलाव लाए.
आदिवासी क्षेत्रों में भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यम से संघ ने विकास और सांस्कृतिक संरक्षण का कार्य किया. राम जन्मभूमि आंदोलन, कश्मीर बचाओ अभियान, छुआछूत, जातिगत भेदभाव व धर्मांतरण के खिलाफ संघ ने जागरूकता फैलाई.
आरएसएस की कार्यप्रणाली का केंद्र इसकी शाखा है, जहां स्वयंसेवक शारीरिक व्यायाम, देशभक्ति गीत और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करते हैं. भगवा ध्वज के समक्ष सामूहिक प्रार्थना और भारत माता की जय के उद्घोष से शाखा अनुशासन, एकता और देशभक्ति की भावना को मजबूत करती है.
हिंदू दर्शन पर आधारित आरएसएस का विचार केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रासंगिक है. यह मानवता की एकता, प्रकृति के साथ संतुलन और आत्म-नियंत्रण जैसे सिद्धांतों को बढ़ावा देता है, जो आज की दुनिया की कई समस्याओं का समाधान प्रस्तुत कर सकता है.
यह भी पढ़ें- बिहार में 2200 साल पुरानी बराबर गुफा: प्राचीन भारत की अद्भुत धरोहर



