Wednesday, March 18, 2026
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बैंक के अंदर खूनी खेल: छुट्टी न मिलने पर गार्ड ने मैनेजर की गोली मारकर हत्या की

Ghaziabad Bank Manager Murder: दिल्ली से सटे गाजियाबाद में एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने कार्यस्थल की सुरक्षा और कर्मचारी-प्रबंधन संबंधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. लोनी बॉर्डर इलाके में स्थित एक बैंक शाखा के भीतर सुरक्षा गार्ड ने ही बैंक मैनेजर की गोली मारकर हत्या कर दी. इस वारदात के बाद इलाके में हड़कंप मच गया.

जानकारी के मुताबिक, घटना सोमवार दोपहर की है, जब पंजाब एंड सिंध बैंक की शाखा में मैनेजर अभिषेक शर्मा अपने केबिन में काम कर रहे थे. तभी बैंक का सुरक्षा गार्ड रविंद्र हुड्डा वहां पहुंचा और दोनों के बीच छुट्टी को लेकर कहासुनी शुरू हो गई. बताया जा रहा है कि गार्ड लंबे समय से छुट्टी न मिलने और वेतन में कटौती से नाराज था.

देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि गार्ड ने गुस्से में आकर बंदूक निकाल ली और मैनेजर के सीने में गोली मार दी. गोली चलने की आवाज से बैंक में मौजूद कर्मचारियों और ग्राहकों में अफरा-तफरी मच गई. कुछ ही सेकंड में पूरा माहौल दहशत में बदल गया.

घायल मैनेजर को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. बताया जा रहा है कि अभिषेक शर्मा मूल रूप से बिहार के रहने वाले थे और हाल ही में इस शाखा में नियुक्त हुए थे. उनके परिवार में पत्नी और एक छोटी बच्ची है. इस घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.

बैंक में करीब तीन माह पहले बागपत के खेकड़ा क्षेत्र के मंसूरपुर गांव निवासी रविंद्र हुड्डा सुरक्षा गार्ड के रूप में नियुक्त हुआ था. वह वर्ष 2018 में सेना से सेवानिवृत्त हुआ था. बैंक कर्मचारियों के अनुसार, रविंद्र अक्सर बिना सूचना के छुट्टी ले लिया करता था, जिस पर मैनेजर अभिषेक शर्मा उसे डांटते थे.

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी गार्ड और उसके सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया है. पूछताछ में आरोपी ने साफ तौर पर कहा कि वह छुट्टी न मिलने और सैलरी कटने से परेशान था. घटना में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिया गया है. सीसीटीवी फुटेज में आरोपी को आराम से बैंक में आते-जाते देखा गया है, जिससे यह साफ होता है कि उसने पूरी योजना के तहत इस वारदात को अंजाम दिया.

यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर बढ़ते तनाव और संवादहीनता की भी गंभीर तस्वीर पेश करती है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते विवाद का समाधान किया जाता, तो शायद एक जिंदगी बचाई जा सकती थी. गाजियाबाद की यह घटना पूरे देश के लिए एक चेतावनी है कि कार्यस्थलों पर संवाद, सहानुभूति और उचित प्रबंधन कितना जरूरी है.

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