Bihar Congress Politics: बिहार की राजनीति में फिर वही पुराना फिल्मी ट्विस्ट- दोस्ती, धोखा और ड्रामा! राज्यसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस को अपने ही तीन विधायकों ने ऐसा “सरप्राइज” दिया कि पार्टी का गणित तो गड़बड़ा ही गया, साथ ही इज्जत का बजट भी घाटे में चला गया.
कांग्रेस के नेता अब सिर पकड़कर सोच रहे हैं कि आखिर ये “तीन तिगाड़ा, काम बिगाड़ा” वाली कहावत इतनी सटीक कैसे बैठ गई. जिन विधायकों पर भरोसा था, उन्होंने ही धोखा दे दिया. अब पार्टी के पास विकल्प क्या है? एक्शन लो तो संख्या घटकर 3 रह जाएगी और एक्शन न लो तो बाकी बचे भी “आत्मनिर्भर” होकर कभी भी उड़ सकते हैं.
राजनीति में वफादारी अब वैसी ही हो गई है जैसे मोबाइल का नेटवर्क कब गायब हो जाए, कोई भरोसा नहीं. कांग्रेस के लिए ये स्थिति वैसी है जैसे शादी में दूल्हा बारात लेकर पहुंचे और पंडित जी कह दें- “मुहूर्त तो निकल गया!”
उधर, इस पूरे घटनाक्रम का साइड इफेक्ट आरजेडी पर भी दिखने लगा है. अगर राजद ने अपनी पार्टी के विधायक पर सख्त कदम उठाया, तो संख्या इतनी घट जाएगी कि तेजस्वी यादव का नेता प्रतिपक्ष का पद भी खतरे में पड़ सकता है. क्योंकि इसके लिए कम से कम 25 विधायक होने अनिवार्य हैं.
इधर सवाल ये है कि क्या कांग्रेस “अनुशासन” का डंडा चलाएगी या “संख्या” बचाने के लिए चुप्पी साधेगी? क्योंकि राजनीति में सिद्धांत और संख्या का रिश्ता भी बड़ा दिलचस्प है, जहां संख्या कम होती है, वहां सिद्धांत भी धीरे-धीरे छुट्टी पर चले जाते हैं.
कांग्रेस के अंदर फिलहाल मीटिंग्स का दौर जारी है. हर नेता दूसरे को शक की नजर से देख रहा है, जैसे क्लास में टीचर पूछे- “चॉक किसने चुराया?” और पूरी क्लास एक-दूसरे को घूरने लगे. पार्टी के बड़े नेता अब “डैमेज कंट्रोल” में जुटे हैं, लेकिन सवाल वही- जब घर के ही लोग दीवार गिराने लगें, तो प्लास्टर कब तक टिकेगा?
कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति में ये एपिसोड साबित करता है कि यहां चुनाव कम और “रियलिटी शो” ज्यादा लगता है. जहां हर कोई अपने वोट को “सीक्रेट टैलेंट” समझकर आखिरी समय में दिखाता है. अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस धोखे को “सबक” बनाती है या “परंपरा” मानकर आगे बढ़ जाती है.
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