Friday, March 6, 2026
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ज्ञानपुर में मानस पाठ की 24 घंटे की मनमोहक प्रस्तुति पर झूमे श्रोता

Manas Path: बड़हरा: भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड स्थित ज्ञानपुर गांव में अखंड रामायण (24 घंटे) का पाठ 31 मई 2024 को सम्पन्न हो गया. इस दौरान संपूर्ण पाठ योगानंद शुक्ला के नेतृत्व में हुआ. आचार्य ब्रह्मेश्वर उपाध्याय ने कहा कि रामायण का शाब्दिक अर्थ राम जोड़ अयण है. परमपूज्य गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपनी रामायण तुलसीकृत के उत्तरकांड में ज्ञान दीपिका का सारगर्भित विवेचन किया है. उनका कथन है कि बड़े-बड़े ग्रंथों, पुराणों व उपनिषदों में भगवत वर्णन तो किया ही गया है, लेकिन आसानी से उसको समझा नहीं जा सकता है. रामायण की ये विशेषता है कि मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं का जितना सम्यम व सरल वर्णन इसमें हुआ है, अन्यत्र नहीं. एक उदाहरण के लिए कहत कठिन समुझत कठिन, साधत कठिन विवेक. होइ घुणाक्षर न्याय जौं पुनी प्रत्यूह अनेक. तात्पर्य यह है कि ज्ञान समझाने में कठिन, समझने में कठिन और साधने में भी कठिन है. यदि संयोगवश यह ज्ञान हो भी जाए, तो फिर उसे बचाए रखने में अनेको विघ्न हैं. ज्ञान का मार्ग दुधारी तलवार के समान है. इस मार्ग से गिरने में देर नहीं लगती. जो इस मार्ग को निर्विघ्न निबाह ले जाता है, वही मोक्षरूप परमपद को प्राप्त करता है.

संपूर्ण रामायण के बालकांड में रामजन्म, राम विवाह, अयोध्या कांड में राम वनवास का दर्द, किष्किंधा कांड में सुग्रीव मिलन और सीता हरण, शबरी की कथा लोकप्रिय रही. सुंदरकांड में हनुमान उत्सव का वर्णन, लंकाकांड में राम रावण युद्ध व विभिषण का राजतिलक, उत्तरकांड में काक-भुशुण्डि कथा व शिवजी का वर्णन, अरण्य कांड में जटायु का प्रसंग का वर्णन श्रद्धालुओं के बीच हुआ. उसके बाद आरती कार्यक्रम किया गया. जिसमें ‘अपना रामजी के आरती उतारी ऐ सखी’, ‘आरती सजवले बानी सोनवा के थाल ततकाल अईह’, ‘माता अंजनी के लाल ततकाल अईह’, ‘जगमग जगमग दीप सजी है’, ‘आरती राउर लागी जय हो महाराजा’ समेत राम, लक्ष्मण, हनुमान की अन्य आरती गाकर पूर्णाहुती के समय श्रद्धालुओं को रामायण पाठ टोली ने भाव विभोर कर दिया.

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मौके पर घांघर मठिया के महंथ बैकुंठ नाथ स्वामीजी महाराज व अन्य संत विराजमान थे. रामायण पाठ टोली में ऑर्गन पर राजीव सिंह, बैंजो पर शैलेंद्र तिवारी, नाल पर मंटू कुमार, झाल पर संजय कुमार, सत्यनारायण, रामायणकर्ता विकास शुक्ला, ओपेन सिंह, नागेंद्र तिवारी समेत अन्य ने रामायण के सातों कांड का वाचन किया. उसके बाद आरती कार्यक्रम पूर्ण कर पूर्णाहुती हुई.

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