Anand Mohan’s Daughter’s Marriage: पटना: बिहार के बाहुबली नेता आनंद मोहन की बेटी की शादी को लेकर चर्चा जोरों पर है. शादी की तैयारी रॉयल अंदाज में की जा रही है. आनंद मोहन की बेटी सुरभि आनंद की शादी पटना के बैरिया इलाके में एक निजी फार्म हाउस में होने वाली है, जहां सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी. इस शादी को खास बनाने के लिए हर छोटी से छोटी बात का ध्यान रखा गया है. शादी 15 फरवरी को, यानी आज ही होगी. इसमें सीएम नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव समेत प्रदेश और केंद्र के कई बड़े नेता भी शामिल होंगे.
बता दें कि पिछले हफ्ते आनंद मोहन अपनी बेटी की शादी में शामिल होने के लिए 15 दिनों की पैरोल पर जेल से बाहर आए थे. वह सहरसा जेल में बंद थे. आनंद मोहन के जेल से बाहर आने के साथ ही उनके घर पर शादी की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हुईं. इसी कड़ी में सोमवार को सुरभि आनंद की हल्दी की रस्म पूरी हुई.
सुरभि की हल्दी सेरेमनी की कई तस्वीरें और वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. जिसमें वह राजस्थानी लहंगा पहने बेहद खूबसूरत लग रही हैं. वीडियो में यह भी देखा जा सकता है कि कैसे सुरभि के माता-पिता हल्दी की रस्म करते नजर आ रहे हैं और इस दौरान घरवालों और दोस्तों ने भी गाने पर डांस किया. सुरभि आनंद दिल्ली हाईकोर्ट में वकील हैं. जबकि, उनके होने वाले पति राजहंस सिंह भारतीय रेल यातायात सेवा (आईआरटीएस), भारत सरकार के ‘ए’ श्रेणी के अधिकारी हैं. राजहंस सिंह का परिवार मुंगेर का रहने वाला है.
बताया जा रहा है कि आनंद मोहन की बेटी की शादी में भीड़ उमड़ने वाली है. शादी में शामिल होने के लिए 15 हजार से भी अधिक लोगों को आमंत्रित किया गया है. भोजन में 100 से अधिक विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाए जा रहे हैं, जिसमें लगभग 50 क्विंटल नॉनवेज तैयार किया जा रहा है. इसमें करीब 25 क्विंटल मटन, 15 क्विंटल चिकन और 10 क्विंटल मछली की व्यवस्था होगी, लेकिन खास बात यह है कि बाराती नॉनवेज नहीं खाएंगे. बारातियों के लिए वेज फूड्स की व्यवस्था की जा रही है. मिठाइयों में गुलाब जामुन, रसगुल्ला, रसमलाई, इमरती, मूंग दाल हलवा समेत 10 तरह के व्यंजन हैं. सभी का मुंह मीठा कराने के लिए करीब 3 लाख रसगुल्ले बनाए जा रहे हैं.
गौरतलब है कि आनंद मोहन 1994 में मुजफ्फरपुर में गोपालगंज के डीएम जी कृष्णैया की पीट-पीट कर हत्या करने के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं. शुरू में कोर्ट ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन बाद में उसे उम्रकैद में बदल दिया गया. आनंद मोहन ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1990 में की थी.
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