CBSE Middle East Exams Cancelled: मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब शिक्षा व्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है. Central Board of Secondary Education (CBSE) ने खाड़ी और पश्चिम एशिया के कुछ देशों में आयोजित होने वाली बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया है. बोर्ड के अनुसार, 16 मार्च से 10 अप्रैल तक होने वाली कक्षा 12 की परीक्षाएं मौजूदा हालात को देखते हुए रद्द कर दी गई हैं.
CBSE ने यह निर्णय छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया है. मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष और अस्थिर स्थिति के कारण कई क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है. ऐसे में, परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंच और परीक्षा आयोजन को लेकर गंभीर चुनौतियां सामने आ रही थीं.
किन देशों में प्रभावित हुई परीक्षाएं
इस फैसले का असर मिडिल ईस्ट के उन देशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों पर पड़ा है, जहां CBSE से संबद्ध स्कूल संचालित होते हैं. इनमें प्रमुख रूप से United Arab Emirates, Saudi Arabia, Qatar, Kuwait, Oman, Bahrain और Iran जैसे देश शामिल हैं. इन देशों में हजारों भारतीय छात्र CBSE बोर्ड से पढ़ाई करते हैं और हर साल बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होते हैं.

छात्रों के रिजल्ट पर क्या होगा असर?
परीक्षाएं रद्द होने के बाद सबसे बड़ा सवाल छात्रों के परिणाम को लेकर उठ रहा है. CBSE ने संकेत दिया है कि प्रभावित छात्रों के रिजल्ट के लिए वैकल्पिक मूल्यांकन प्रणाली अपनाई जा सकती है. इसके तहत छात्रों के प्री-बोर्ड परीक्षा, इंटरनल असेसमेंट, प्रैक्टिकल और स्कूल रिकॉर्ड को आधार बनाया जा सकता है. हालांकि, बोर्ड ने अभी अंतिम प्रक्रिया की घोषणा नहीं की है और जल्द ही इस पर विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे.
छात्रों और अभिभावकों में चिंता
मिडिल ईस्ट में पढ़ने वाले कई छात्र उच्च शिक्षा के लिए भारत और विदेश के विश्वविद्यालयों में आवेदन करने की तैयारी कर रहे थे. ऐसे में, परीक्षा रद्द होने से उनके बीच असमंजस की स्थिति बन गई है. अभिभावकों का कहना है कि जल्द से जल्द परिणाम की प्रक्रिया स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि छात्रों की आगे की पढ़ाई प्रभावित न हो.
सुरक्षा को दी गई प्राथमिकता
CBSE का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. जब तक क्षेत्र में हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक बड़े स्तर पर परीक्षा आयोजित करना संभव नहीं है. इसलिए बोर्ड ने सावधानी बरतते हुए यह निर्णय लिया है.
युद्ध की बढ़ती आंच अब केवल राजनीतिक और सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर शिक्षा और छात्रों के भविष्य पर भी पड़ने लगा है. ऐसे में, अब हजारों छात्र CBSE के अगले फैसले का इंतजार कर रहे हैं, जिससे उनके परिणाम और आगे की पढ़ाई को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके.
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