LPG Cylinder Supply Crisis: घरेलू एलपीजी सिलेंडर के वितरण और बुकिंग से जुड़े नियमों में हाल ही में हुए बदलाव के बाद देश के कई जगहों पर रसोई गैस की किल्लत गहराने लगी है. गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं और कई लोगों को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है. इससे आम लोगों की रसोई पर सीधा असर पड़ रहा है और कई परिवारों को खाना बनाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
दरअसल, केंद्र सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग व्यवस्था में बदलाव करते हुए दो सिलेंडरों की बुकिंग के बीच न्यूनतम समय बढ़ा दिया है. पहले उपभोक्ता एक सिलेंडर की डिलीवरी के 21 दिन बाद दूसरा सिलेंडर बुक कर सकते थे, लेकिन अब यह अवधि बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई है. यह निर्णय जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए लिया गया है, ताकि सीमित आपूर्ति की स्थिति में सभी उपभोक्ताओं को गैस मिल सके.
सरकार के इस फैसले के बाद कई जिलों और शहरों में गैस की उपलब्धता प्रभावित होने लगी है. कई उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें तय समय से ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है. जिन घरों में सिर्फ एक ही सिलेंडर है, वहां स्थिति और भी गंभीर हो गई है. कई जगहों पर लोग गैस खत्म होने के बाद एजेंसियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं.
गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि नए नियम लागू होने के बाद वितरण व्यवस्था पर असर पड़ा है. अब हर उपभोक्ता को तय समय के बाद ही दूसरा सिलेंडर दिया जा सकता है, इसलिए एजेंसियां भी नियमों का पालन करने के लिए बाध्य हैं. इसके अलावा, अचानक बढ़ी मांग और सीमित सप्लाई के कारण भी कई जगहों पर देरी हो रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का भी एलपीजी आपूर्ति पर असर पड़ रहा है. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े संकट के कारण वैश्विक स्तर पर गैस सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ रहा है.
हालांकि, सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है और घबराने की जरूरत नहीं है. साथ ही रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि आपूर्ति जल्द सामान्य हो सके.
फिलहाल उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि जल्द ही गैस आपूर्ति की स्थिति सुधरेगी. लेकिन तब तक नए नियमों के कारण रसोई गैस की किल्लत से लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
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