Women Safety in Holi: होली रंगों और खुशियों का त्योहार है, लेकिन कई बार कुछ लोग इस पर्व की आड़ में मर्यादा की सीमाएं लांघ देते हैं. “बुरा न मानो होली है” कहकर महिलाओं और लड़कियों पर जबरन रंग डालना, उन्हें छूना या अभद्र टिप्पणी करना महंगा पड़ सकता है. कानून कहता है कि किसी भी महिला की इच्छा के खिलाफ रंग लगाना या बदसलूकी करना अपराध की श्रेणी में आता है.
कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को उसकी अनुमति के बिना रंग लगाता है, छेड़छाड़ करता है या अनुचित व्यवहार करता है, तो उस पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 (महिला की लज्जा या मर्यादा भंग करने का प्रयास) और 79 (शब्द, इशारा या कृत्य से महिला की गरिमा का अपमान) के तहत मामला दर्ज हो सकता है. दोषी पाए जाने पर आरोपी को जेल की सजा और जुर्माना दोनों भुगतने पड़ सकते हैं.
त्योहार के दौरान पुलिस प्रशासन भी अलर्ट मोड में रहता है. सार्वजनिक स्थानों, बाजारों और कॉलोनियों में गश्त बढ़ा दी जाती है, ताकि किसी भी प्रकार की घटना को तुरंत रोका जा सके. कई शहरों में महिला हेल्पलाइन और विशेष पुलिस टीमों को भी सक्रिय किया जाता है, ताकि पीड़िता तुरंत शिकायत दर्ज करा सके.
विशेषज्ञों का कहना है कि सहमति सबसे महत्वपूर्ण है. यदि सामने वाला व्यक्ति रंग नहीं खेलना चाहता, तो उसके फैसले का सम्मान करना ही सच्ची होली है. किसी पर दबाव डालना या मजाक के नाम पर असहज करना सामाजिक और कानूनी दोनों दृष्टि से गलत है.
सोशल मीडिया पर भी इस बार जागरूकता अभियान चल रहे हैं, जिनमें लोगों से अपील की जा रही है कि त्योहार को सभ्यता और सम्मान के साथ मनाएं. स्कूलों और कॉलेजों में भी छात्र-छात्राओं को उनके अधिकारों और कानूनी प्रावधानों के बारे में जानकारी दी जा रही है.
होली खुशियों का पर्व है, न कि किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाने का अवसर. इसलिए याद रखें- “बुरा न मानो होली है” अब किसी भी गलत हरकत का लाइसेंस नहीं है. कानून का सम्मान करें, सहमति का ध्यान रखें और त्योहार को सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण बनाएं.
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