NMCH Fake Doctor Case: एनएमसीएच (पटना के Nalanda Medical College and Hospital) में एक बहुत ही गंभीर मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ मरीजों की सुरक्षित चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि अस्पताल प्रशासन और कानून व्यवस्था पर भी गंभीर आलोचना की जा रही है. शनिवार को अस्पताल के एनेस्थीसिया विभाग के निरीक्षण के दौरान एक ऐसे युवक को पकड़ा गया, जो फर्जी डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज कर रहा था. जांच में खुलासा हुआ कि वह व्यक्ति खुद किसी भी वैध डॉक्टरी योग्यता या रजिस्ट्रेशन के बिना अपने भाई के स्थान पर ड्यूटी कर रहा था, यानी असली इंटर्न डॉक्टर की जगह उसका रिश्तेदार मरीजों के इलाज में शामिल था.
जब विभागाध्यक्ष ने दस्तावेज जांचने की कोशिश की, तो पता चला कि उस व्यक्ति का नाम और पहचान अस्पताल के रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा था. इसके बाद उससे पूछताछ की गई तो वह खुद को इंटर्न डॉक्टर का भाई बता रहा था और ड्यूटी पर काम कर रहा था. इस पर पुलिस को सूचना दी गई और युवक को गिरफ्तार कर लिया गया.
यह मामला बेहद गंभीर और चिंताजनक है, क्योंकि किसी प्रतिष्ठित अस्पताल में यदि कोई फर्जी डॉक्टर मरीजों को सलाह दे, दवाइयां लिखे या चिकित्सकीय प्रक्रिया में शामिल हो, तो इसके दुष्परिणाम अत्यंत घातक साबित हो सकते हैं. ऐसी लापरवाही न सिर्फ मरीजों की जान को जोखिम में डालती है, बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती है. अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि पूरी घटना की जांच जारी है और भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए सभी इंटर्न, स्टाफ और कर्मियों के पहचान सत्यापन को और सख्त किया जाएगा.
विशेषज्ञों की मानें तो जो व्यक्ति बिना योग्य प्रमाण-पत्र के इलाज दे रहा था वह सीधे तौर पर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ जैसा है और यह मामला मेडिकल क्षेत्र में सुरक्षा मानकों व निगरानी की कमी को उजागर करता है. ऐसे मामलों में न केवल अस्पताल प्रशासन जिम्मेदार होता है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में भी पारदर्शिता और कड़ाई लाना जरूरी है, ताकि मरीजों का भरोसा बना रहे और स्वास्थ्य सेवाएं सुरक्षित हों.
यह घटना राष्ट्रीय चिकित्सा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है और यह मांग बढ़ाती है कि फर्जी डॉक्टरी गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और त्वरित जांच प्रक्रियाएं लागू हों.
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