UGC Rules Protest: यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 नियमों को लेकर देशभर में विरोध तेज होता जा रहा है. खासतौर पर सवर्ण (जनरल) समुदाय में असंतोष तेजी से बढ़ा है और वह इसे अपने हितों के विरुद्ध मान रहा है.
गुमला में निर्णायक बैठक: झारखंड के गुमला में वीर कुंवर सिंह भवन में सवर्ण समाज की एक निर्णायक बैठक हुई, जिसमें यूजीसी बिल के खिलाफ आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई. बैठक की अध्यक्षता विजय बहादुर सिंह ने की, जिसमें कई समाजसेवी और युवा नेता मौजूद रहे. उन्होंने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि अगर सरकार नई यूजीसी विनियमों को वापस नहीं लेती, तो 1 फरवरी को भारत बंद जैसा राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने माना कि यह बिल शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य के लिए हानिकारक है. इसके विरोध में सवर्ण समाज को संगठित होकर संघर्ष करना जरूरी है. बैठक में बंद व धरनों सहित आंदोलन की रणनीति पर भी चर्चा हुई.
देशभर में सवर्ण विरोध: गुमला से बाहर भी कई राज्यों में सवर्ण समुदाय के समूहों ने विरोध तेज कर दिया है. राजस्थान के कई जिलों में राजपूत, ब्राह्मण और अन्य सवर्ण संगठनों ने यूजीसी नियमों को “काले कानून” बताते हुए रैलियां और उग्र प्रदर्शन किए हैं.
पटना, गोंडा, फतेहपुर जैसे स्थानों पर भी छात्र और सामाजिक संगठन मैदान पर उतर आए हैं और राष्ट्रपति व केंद्र सरकार से नियमों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. इसी क्रम में करणी सेना सहित कई सामाजिक संगठनों ने सरकार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से 1 फरवरी को भारत बंद का आह्वान किया है.
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया: इस आंदोलन को लेकर राजनीतिक उथल-पुथल भी बढ़ रही है. कुछ दलों ने नियमों का समर्थन किया है, जबकि कई सवर्ण युवा और सामाजिक संगठन इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए खारिज कर रहे हैं. विरोध के कारण कुछ राजनीतिक नेतृत्व में आंतरिक असहमति भी देखी जा रही है.
सवर्ण समाज का यह ऐलान-ए-जंग अब 1 फरवरी के भारत बंद के रूप में साकार होने की ओर बढ़ रहा है, जिससे शिक्षा नीति की दिशा और सामाजिक संतुलन को लेकर बहस और अधिक तेज होने की संभावना है.
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