Bihar News: बिहार में डेयरी उत्पादों के अमानक और मिलावटी कारोबार (सफेद जहर का काला कारोबार) ने खाद्य सुरक्षा को बड़ा संकट में डाल दिया है. पटना जंक्शन के पास खाद्य संरक्षा विभाग की टीम ने दूध मंडी में छापेमारी करके करीब 500 किलो घटिया पनीर जब्त किया और 100 लीटर से अधिक अमानक दूध नष्ट किया, जो सामान्य जांच में पक्का दूध नहीं पाया गया. बीटाडीन से प्राथमिक टेस्ट करने पर पनीर काला पड़ गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि इसमें हानिकारक मिलावट थी.
मिलावट के गंभीर तरीके
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ स्थानों पर क्रीम निकालकर बचे दूध में दूध पाउडर व आरारोट मिलाकर दही तैयार किया जा रहा था, जिसे होटल और रेस्त्रां को बेचा जाता था. दूध के बजाय मिलावटी पाउडर का इस्तेमाल उपभोक्ताओं को धोखा देने जैसा है. ऐसे घटिया उत्पाद बाजार में 150–200 रुपये प्रति किलो की दर पर बिक रहे हैं, जबकि असली पनीर की कीमतें 400–450 रुपये प्रति किलो से ऊपर हैं.
स्वास्थ्य पर प्रभाव और जांच की जरूरत
यह मिलावटी पनीर और दूध स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है, क्योंकि दूध पाउडर और आरारोट जैसा स्टार्च स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का कारण बनता है. इस तरह के मिलावटी उत्पाद खाने से पेट की समस्याएं, स्वास्थ्य असंतुलन और गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, इसलिए प्राथमिक जांच और सतर्कता आवश्यक है.
केंद्रीय व स्थानीय जवाबदेही
दरअसल, भारत में खाद्य सुरक्षा को लेकर भी हाल ही में FSSAI ने दूध, पनीर और खोया जैसे उत्पादों की मिलावट के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाने के आदेश दिए हैं. यह अभियान सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मिलावट और भ्रांति से बचने के लिए शुरू किया गया है, ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और जेन्युइन डेयरी उत्पाद मिलें.
जागरूकता और कार्रवाई
बिहार में यह खुलासा दर्शाता है कि मिलावटी सफेद उत्पादों का काला कारोबार सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि कई स्थानों पर फैल चुका है. उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे पैकेज्ड और विश्वसनीय ब्रांडेड दूध उत्पाद चुनें और संदिग्ध माल होने पर प्रशासन को रिपोर्ट करें. खाद्य सुरक्षा विभाग की सतर्कता और समय-समय पर छापेमारी से ही इस “सफेद जहर” के काले कारोबार को रोका जा सकता है.
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