Friday, March 6, 2026
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दिल्ली में ‘जहरीली हवा’ से औसत आयु 1.7 साल घटी! RBI रिपोर्ट में बिहार की पोजीशन क्या है?

Air Pollution: राजधानी दिल्ली इन दिनों जहरीली हवा की मार झेल रही है और इसका असर लोगों के स्वास्थ्य और जीवन प्रत्याशा पर स्पष्ट दिख रहा है. हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि पिछले चार वर्षों में प्रदूषण के कारण दिल्ली में लोगों की औसत आयु लगभग 1.7 साल तक कम हुई है. यह गिरावट स्वास्थ्य, वायु गुणवत्ता और जीवनशैली के बिगड़ते मिश्रण का परिणाम है.

RBI की सांख्यिकी पुस्तिका में कहा गया है कि पंजाब, हरियाणा और दिल्ली जैसे उत्तरी राज्यों में वायु और पर्यावरण प्रदूषण के कारण औसत जीवन प्रत्याशा में कमी आई है, जबकि कुछ अन्य राज्यों में स्वास्थ्य सेवाओं और जीवनशैली में सुधार से औसत आयु बढ़ रही है.

वायु प्रदूषण का प्रभाव राजधानी के नागरिकों पर पहले से ही गंभीर रहा है. दिल्ली-NCR में AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) लगातार ‘गंभीर’ श्रेणी में बना हुआ है. कई इलाकों में AQI 400–700 तक पहुंच रहा है, जिससे सांस संबंधी बीमारियों, अस्थमा, हृदय और फेफड़ों की बीमारियों में तेजी से वृद्धि हुई है.

बिहार की स्थिति:
बिहार में भी हवा की गुणवत्ता में गिरावट देखी जा रही है, खासकर सर्दियों के बाद जब विभिन्न शहरों में AQI 200 से ऊपर पहुंचा है, जिससे आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं सामने आई हैं.

हालांकि, RBI की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि बिहार में औसत आयु में गिरावट नहीं, बल्कि थोड़ी वृद्धि दर्ज की गई है. रिपोर्ट के अनुसार, बिहार की औसत आयु लगभग 69.3 वर्ष तक पहुंची है, जो पिछले आंकड़ों के मुकाबले थोड़ी बढ़त दर्शाती है.

विश्लेषकों का कहना है कि बिहार में स्वास्थ्य सुविधाएं और जीवनशैली में सुधार का असर दिख रहा है, वहीं दिल्ली जैसे महानगरों में लगातार बढ़ते प्रदूषण, वाहनों का धुआं, निर्माण धूल और पराली जलाने जैसी गतिविधियां प्रदूषण स्तर को और गंभीर बना रही हैं.

दिल्ली में जहरीली हवा का प्रभाव न सिर्फ रोजमर्रा के स्वास्थ्य पर, बल्कि औसत जीवन प्रत्याशा पर भी गंभीर परिणाम दे रहा है. वहीं, बिहार में औसत आयु में वृद्धि के संकेत इसे प्रदूषण प्रबंधन की दिशा में एक सकारात्मक संकेत बनाते हैं. ऐसे में, राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर सक्रिय कदम उठाना बेहद जरूरी है, ताकि वायु गुणवत्ता सुधार और लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

यह भी पढ़ें- एआई की दौड़ में भारत का दबदबा, दुनिया में तीसरा सबसे मजबूत देश बना

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