Friday, March 6, 2026
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बिहार में शुरू हुई छठ महापर्व की जोरदार तैयारी, जानिए नहाय-खाय, खरना और अर्घ्य की सही तिथियां

Chhath Puja 2025: बिहार में लोक आस्था का महान पर्व छठ महापर्व नजदीक आते ही श्रद्धालुओं में भक्ति और उल्लास का माहौल छा गया है. गली-मुहल्लों से लेकर घाटों तक सफाई और सजावट का काम जोरों पर है. हर ओर छठी मैया की गीतों और श्रद्धा की गूंज सुनाई दे रही है. यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का प्रतीक है, जो चार दिनों तक अत्यंत नियम-संयम और शुद्धता के साथ मनाया जाता है.

छठ पूजा 2025 की तिथियां

इस वर्ष छठ पूजा अक्टूबर 2025 के अंतिम सप्ताह में मनाई जाएगी. पंचांग के अनुसार—

नहाय-खाय: शनिवार, 25 अक्टूबर 2025

खरना: रविवार, 26 अक्टूबर 2025

संध्या अर्घ्य: सोमवार, 27 अक्टूबर 2025 (सूर्यास्त के समय)

उषा अर्घ्य: मंगलवार, 28 अक्टूबर 2025 (सूर्योदय के समय)

इन चार दिनों में श्रद्धालु स्नान-भोजन से लेकर उपवास, खरना, डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक सभी परंपराओं का पालन करते हैं.

चार दिवसीय अनुष्ठान

पहला दिन – नहाय-खाय:
व्रती गंगा या पवित्र नदी में स्नान करके सात्विक भोजन करते हैं. घर की सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है.

दूसरा दिन – खरना:
छठ पूजा का दूसरा दिन खरना कहलाता है, जो अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं और शाम को सूर्यास्त के बाद गुड़ और चावल की खीर, रोटी और केला से प्रसाद तैयार करती हैं. प्रसाद पहले छठी मैया को अर्पित किया जाता है, फिर व्रती उसी प्रसाद को ग्रहण करती हैं. इसके बाद से 36 घंटे का कठोर निर्जला व्रत आरंभ होता है.

तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य:
महिलाएं पारंपरिक साज-सज्जा में घाट पर पहुंचकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देती हैं. घाटों पर लोकगीतों और श्रद्धा का अनोखा संगम देखने को मिलता है.

चौथा दिन – उषा अर्घ्य:
प्रातः काल उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का समापन किया जाता है. प्रसाद वितरण के साथ परिवार में खुशहाली और समृद्धि की कामना की जाती है.

पर्व का महत्व
छठ पूजा सूर्य की आराधना का ऐसा पर्व है, जो व्यक्ति, प्रकृति और आस्था को एक सूत्र में जोड़ता है. यह न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है, बल्कि संयम, शुद्धता और सामूहिकता की मिसाल भी पेश करता है.

इस बार 2025 में बिहार सरकार ने घाटों की सफाई, बिजली और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष योजनाएं शुरू की हैं. श्रद्धालु उत्साहपूर्वक तैयारी में जुटे हैं, ताकि छठी मैया की पूजा भव्य और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके.

यह भी पढ़ें- श्रीराम से जुड़ी है दीपावली की परंपरा, तो क्यों की जाती है लक्ष्मी-गणेश की पूजा?

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