Special Trains: त्योहारों के मौसम में जब देशभर में यात्रियों की भीड़ बढ़ जाती है, भारतीय रेलवे अतिरिक्त दबाव को संभालने के लिए स्पेशल ट्रेनों का संचालन करता है. लेकिन इस बार रेलवे प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है. अब यदि कोई स्पेशल ट्रेन लेट होती है, तो इसकी जवाबदेही सीधे संबंधित अधिकारियों पर तय की जाएगी.
रेल मंत्रालय के ताजा निर्देशों के अनुसार, ट्रेन संचालन से लेकर सिग्नलिंग, रूट क्लियरेंस और लोको पायलट की तैनाती तक हर स्तर पर समयपालन की निगरानी की जाएगी. यदि किसी ट्रेन के लेट होने की शिकायत आती है, तो यह पता लगाया जाएगा कि देरी का कारण तकनीकी था या मानव त्रुटि. जिस अधिकारी के क्षेत्र में लापरवाही पाई जाएगी, उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
यह निर्णय खासतौर पर त्योहारी भीड़ को देखते हुए लिया गया है. दीपावली, छठ और क्रिसमस जैसे अवसरों पर यात्रियों की संख्या लाखों में पहुंच जाती है. ऐसे में, ट्रेन का लेट होना पूरे सिस्टम पर दबाव बढ़ा देता है. रेलवे बोर्ड ने जोनल और डिविजनल स्तर पर विशेष टीमों का गठन किया है, जो प्रत्येक स्पेशल ट्रेन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करेंगी.
किसी भी स्पेशल ट्रेन को बिना उचित कारण देर तक रोकने या किसी अन्य ट्रेन को अनावश्यक रूप से प्राथमिकता देने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से जवाबदेही तय की जाएगी व उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी.
रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों को समय पर गंतव्य तक पहुंचाना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है. इसके साथ ही ट्रेनों की सफाई, खानपान और सुरक्षा की गुणवत्ता पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी. देरी की स्थिति में अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और बार-बार गलती करने वालों को पद से हटाया जा सकता है.
रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौसम, प्राकृतिक आपदाओं या किसी अन्य आपात स्थिति में होने वाली देरी को अलग श्रेणी में रखा जाएगा. लेकिन मानव लापरवाही या समन्वय की कमी अब किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
यह कदम रेलवे प्रशासन के ‘ऑपरेशन समयपालन अभियान’ का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य यात्रियों को बेहतर और भरोसेमंद सेवा देना है. उम्मीद की जा रही है कि इससे ट्रेनें समय पर चलेंगी और यात्रियों का रेलवे पर विश्वास और भी मजबूत होगा.
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