Friday, March 6, 2026
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025: कौन मैदान में, किनके बीच है मुकाबला और किसका पलड़ा भारी?

Bihar Election 2025: चुनाव आयोग ने सोमवार को बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का औपचारिक ऐलान कर दिया है. इस बार राज्य में चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे. पहले चरण का मतदान 6 नवंबर 2025 को होगा, जबकि दूसरे चरण के लिए वोटिंग 11 नवंबर 2025 को निर्धारित की गई है. वहीं, मतगणना की प्रक्रिया 14 नवंबर 2025 को संपन्न होगी और इसी दिन नतीजों की घोषणा की जाएगी .

चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होते ही राज्य का सियासी माहौल पूरी तरह गर्म हो गया है. सभी दलों ने अपने उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने और प्रचार रणनीति को धार देने की तैयारी तेज कर दी है. सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों ही अब जनता तक अपने-अपने मुद्दे पहुंचाने में जुट गए हैं, जिससे आने वाले दिनों में बिहार की सियासत में रोमांचक मुकाबला देखने को मिल सकता है.

चुनाव में मुख्य गठबंधन जो सक्रिय हैं, उनमें NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) और महागठबंधन / INDIA ब्लॉक शामिल हैं. इसके अलावा, एक नया खिलाड़ी है जन सुराज पार्टी, जो खुद को तीसरा मोर्चा बनाने की कोशिश करता दिख रहा है. NDA के अंदर BJP, JDU और LJP (Ram Vilas), HAM आदि छोटे सहयोगी दल भी हैं जो सीट शेयरिंग की खींचतान कर रहे हैं. महागठबंधन में RJD, कांग्रेस, कुछ लेफ्ट पार्टियां (CPI, CPI-ML) और VIP जैसे दल शामिल हैं.

किनके बीच टक्कर? (मुख्य मुकाबले)

NDA vs महागठबंधन
मुख्य मुकाबला इन्हीं के बीच है. NDA की सरकार ने 2020 में बहुमत हासिल की थी. महागठबंधन इस बार सीट बंटवारे, गठबंधन स्थिरता, रणनीति आदि पर मजबूत तैयारी कर रहा है.

नए दलों / तीसरे मोर्चा का प्रभाव
जन सुराज पार्टी की एंट्री राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव ला सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मतदाता बदलाव चाहते हैं. साथ ही LJP (Ram Vilas) के चिराग पासवान की सीट मांग व उनकी स्थिति NDA के अंदर महत्वपूर्ण कारक है.

सीट बंटवारे और गठबंधन संघर्ष
NDA में रहने वाले छोटे दलों की सीटों की मांगें बढ़ी हुई हैं, जैसे कि LJP की सीट मांगों को लेकर BJP और अन्य साथी दलों के बीच खींचतान है. उधर, हम प्रमुख जीतन राम मांझी ने कहा कि वे खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी पार्टी को 15 से कम सीटें दी गईं, तो वे चुनाव नहीं लड़ेंगे, हालांकि वे एनडीए में बने रहेंगे. महागठबंधन भी सीट बंटवारे को लेकर तनाव में है. सीपीआई-एमएल लिबरेशन ने आरजेडी द्वारा प्रस्तावित संख्या को ठुकराया है और अधिक सीटें मांगी हैं.

किसका पलड़ा भारी?
फिलहाल कुछ सर्वे और राजनीति विश्लेषण ये संकेत देते हैं कि NDA की स्थिति कुछ मजबूत दिखती है, यदि गठबंधन पूरी तरह से एकजुट रहा और छोटे दलों के बीच सीट बंटवारा ठीक से हुआ. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (JDU) की लोकप्रियता, विशेषकर “गवर्नेंस” (शासन) और कानून-व्यवस्था के मामलों में जनता के बीच सकारात्मक छवि बनाए हुए है.

महागठबंधन को जहां जातीय समीकरणों, खासकर यादव-मुस्लिम और ओबीसी समुदायों के समर्थन से फायदा मिलने की उम्मीद है, वहीं इसकी सफलता काफी हद तक गठबंधन की एकजुटता और नेतृत्व समन्वय पर निर्भर करेगी. जन सुराज पार्टी यदि कुछ क्षेत्रीय सफलता दिखाए, तो वह “मतांतर” (Vote Split) का काम कर सकती है, जिससे यह देखना होगा कि वह महागठबंधन या NDA में से किनके वोटरों से कितनी वोटें खींचेगी.

बिहार चुनाव 2025 में पलड़ा फिलहाल NDA के झुकाव के साथ नजर आता है, विशेषकर यदि गठबंधन मजबूत बना रहे और सीट बंटवारे की चुनौतियां हल हो जाएं. लेकिन यह कोई सुनिश्चित जीत नहीं. महागठबंधन यदि रणनीतिक रूप से काम करे, जातीय समीकरणों को मजबूती से साधे और जन सुराज जैसी नई पार्टी से मत विभाजन हो, तो चुनाव नतीजे पूरी तरह बदल सकते हैं.

यह भी पढ़ें- बिहार में चुनाव की घोषणा के साथ ही लागू हुई आचार संहिता, जानिए क्या कर सकते हैं और क्या नहीं

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