VETO Power: सोशल मीडिया पर हाल ही में एक दावा खूब वायरल हो रहा है कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता और वीटो (Veto) अधिकार मिल गया है. लेकिन क्या यह सच है? वर्तमान में केवल 5 स्थायी सदस्य (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन) के पास ही वीटो पावर है. भारत कई बार गैर-स्थायी सदस्य (Non-Permanent Member) रह चुका है और UNSC में सुधार (Reforms) की मांग लगातार कर रहा है. भारत G4 समूह (भारत, जापान, जर्मनी, ब्राजील) के साथ मिलकर स्थायी सदस्यता और वीटो अधिकार की मांग करता है, लेकिन अभी तक इस पर कोई वैश्विक सहमति नहीं बनी है. जांच करने पर निष्कर्ष मिलता है कि यह एक भ्रामक और झूठा दावा है.
UNSC की संरचना और Veto अधिकार
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की शुरुआत 1945 में हुई और इसके पास 15 सदस्य हैं, जिनमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य शामिल हैं. इन पांच स्थायी सदस्यों को Veto Power प्राप्त है. यानी, यदि कोई प्रस्ताव पास करने के लिए अधिकांश मतों को प्राप्त कर भी ले, तब भी यदि कोई एक स्थायी सदस्य उसका विरोध करता है, तो वह प्रस्ताव विफल हो जाएगा.
भारत की स्थिति क्या है?
भारत आज तक UNSC का स्थायी सदस्य नहीं है और न ही इसे वीटो शक्ति मिली है. विश्वसनीय फैक्ट-चेक स्रोतों की जांच में यह पाया गया कि कोई आधिकारिक प्रस्ताव या संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन नहीं हुआ है जिससे भारत को वीटो शक्ति दी गई हो.
प्रक्रिया (कैसे मिलेगा Veto Power?)
UNSC सुधार का प्रस्ताव – सबसे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में सुरक्षा परिषद सुधार का प्रस्ताव रखना होगा.
दो-तिहाई बहुमत – इस प्रस्ताव को महासभा के दो-तिहाई देशों (193 में से कम से कम 129 देश) का समर्थन चाहिए.
UN चार्टर में संशोधन – भारत को स्थायी सदस्य बनाने और वीटो देने के लिए UN Charter (संयुक्त राष्ट्र का संविधान) में बदलाव करना होगा.
P5 देशों की मंजूरी – सबसे मुश्किल हिस्सा यही है. मौजूदा 5 स्थायी सदस्य (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन) को इस बदलाव पर सहमत होना पड़ेगा, क्योंकि उन्हीं के पास वीटो है. अगर इनमें से कोई भी एक देश विरोध करता है, तो प्रस्ताव रुक जाएगा.
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