RSS Centenary Year: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) इस समय अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है. संघ की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में की थी. इसलिए विजयादशमी संघ का स्थापना दिवस भी माना जाता है. आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को महाराष्ट्र के नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में विजयादशमी के अवसर पर संबोधन दिया. उन्होंने देश और समाज के विकास हेतु नए आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया.
भागवत ने कहा कि आज दुनिया जिन समस्याओं से जूझ रही है, उनमें पर्यावरण का क्षरण, प्रकृति का प्रकोप, परिवार और समाज में बढ़ती विघटन की प्रवृत्ति व नागरिक जीवन में फैल रहा अनाचार और अत्याचार प्रमुख हैं. ये चुनौतियां केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय बन चुकी हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि इन कठिनाइयों से उबरने के लिए हमें अपने स्वदेशी आर्थिक दर्शन पर आधारित एक नया और टिकाऊ आर्थिक मॉडल तैयार करना होगा. यह मॉडल न केवल पर्यावरण और समाज के संतुलन को मजबूत करेगा, बल्कि आर्थिक विकास को भी स्थायी और सबके हित में सुनिश्चित करेगा.
शताब्दी वर्ष और विजयादशमी उत्सव
इस बार का विजयादशमी उत्सव संघ के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि यह उसके 100वें वर्ष में प्रवेश का अवसर है. परंपरा के अनुसार, हर साल विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन, पथ-संचलन (मार्च पास्ट), शाखाओं का विशेष प्रदर्शन और प्रमुख वक्ताओं के संबोधन का आयोजन होता है. शताब्दी वर्ष में कार्यक्रम और भी बड़े स्तर पर किए जा रहे हैं.
क्यों खास है यह उत्सव?
शताब्दी की शुरुआत – यह उत्सव आने वाले एक वर्ष तक चलने वाले शताब्दी समारोहों का सूत्रपात कर रहा है.
देशभर में शाखाएं – संघ की शाखाओं और विभिन्न संगठनों के माध्यम से गांव-गांव में विशेष आयोजन किए जा रहे हैं.
सांस्कृतिक व वैचारिक कार्यक्रम – समाज में एकता, स्वावलंबन, राष्ट्रभक्ति और संस्कारों को मजबूत करने के संदेश पर विशेष बल दिया जा रहा है.

संघ की दृष्टि से महत्व
विजयादशमी का पर्व अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक है. संघ इसे राष्ट्रीय एकता, संगठन और अनुशासन के संदेश के रूप में मनाता है. शताब्दी वर्ष का यह आयोजन संघ की अब तक की यात्रा, उसके विस्तार और समाज पर पड़े प्रभाव का भी प्रतीक माना जा रहा है.
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