Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार में इस बार निर्वाचन आयोग ने साफ संकेत दे दिया है कि महिलाओं की गरिमा पर चोट करने वाले किसी भी बयान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. चुनावी भाषणों और रैलियों में नेताओं की जुबान पर आयोग की सख्त नजर रहेगी. किसी भी राजनीतिक दल के नेता यदि किसी महिला उम्मीदवार या महिला मतदाता पर कोई अभद्र टिप्पणी करेंगे तो उनके खिलाफ राज्य महिला आयोग स्वतः संज्ञान लेगा.
पिछले कुछ वर्षों में कई बार देखा गया है कि चुनावी भाषणों में राजनीतिक कटाक्ष करते-करते नेता महिलाओं पर व्यक्तिगत टिप्पणियां कर बैठते हैं. इस बार आयोग ने चुनावी आचार संहिता के दिशानिर्देशों में विशेष रूप से उल्लेख किया है कि महिलाओं से जुड़े अपमानजनक या अशोभनीय बयान पर तुरंत एक्शन होगा. इसमें न सिर्फ चेतावनी और नोटिस जारी किए जाएंगे, बल्कि गंभीर मामलों में FIR दर्ज करने तक की कार्रवाई होगी.
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) कार्यालय ने सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे प्रचार सभाओं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और स्थानीय भाषणों पर पैनी नजर रखें. किसी भी शिकायत या वायरल वीडियो के आधार पर त्वरित जांच कर रिपोर्ट आयोग को भेजनी होगी.
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार की राजनीति में महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभाती हैं. 2020 के चुनाव में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा था. यही कारण है कि सभी दल महिलाओं को आकर्षित करने के लिए योजनाओं और घोषणाओं की झड़ी लगाते हैं. ऐसे में, यदि नेता महिलाओं पर बिगड़े बोल बोलते हैं, तो इसका सीधा असर चुनावी परिणाम पर पड़ सकता है.
पिछले दिनों कुछ नेताओं के बयानों पर सोशल मीडिया में काफी आलोचना हुई थी. महिला संगठनों ने भी आयोग से सख्ती बरतने की मांग की थी. इसी दबाव के बाद आयोग ने चुनावी प्रक्रिया को गरिमामय बनाए रखने के लिए यह पहल की है.
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आयोग का यह कदम स्वागत योग्य है. चुनावी प्रतिस्पर्धा चाहे जितनी भी कड़ी हो, नेताओं को अपनी भाषा और आचरण में मर्यादा रखनी होगी. महिलाओं की गरिमा पर आघात करने वाले बयान अब सिर्फ विवाद नहीं, बल्कि कानूनी कार्रवाई का कारण भी बन सकते हैं.
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