Friday, March 6, 2026
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Gen Z को साधकर देश का माहौल गरमाना चाहते हैं राहुल गांधी?

Rahul Gandhi’s Vote Chori Claim: राहुल गांधी ने 18 सितंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग (Election Commission of India) को निशाने पर लिया. उन्होंने दावा किया कि कई राज्यों- कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, हरियाणा में सैकड़ों या हजारों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से अनियमित तरीके से हटाए गए हैं, विशेष रूप से उन बूथों पर जहां कांग्रेस का प्रभाव अधिक है.

राहुल का कहना है कि यह सिर्फ एक या दो मामले नहीं, बल्कि एक केंद्रित, सॉफ्टवेयर/स्वचालित प्रणाली द्वारा की जा रही कार्रवाई है, जिसमें एक ही मोबाइल नंबर, एक ही लॉगिन से कई आवेदन होने और बूथ स्तर पर असामान्य गतिविधियां पाई जा रही हैं. उन्होंने आलंद विधानसभा क्षेत्र में 6,018 मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगाया, जहां एक बूथ स्तर की अधिकारी ने अपने रिश्तेदार का नाम हटाए जाने की शिकायत की, जिससे यह मामला सामने आया.

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि कर्नाटक CID ने इस मतदाता नाम कटाई मुद्दे पर चुनाव आयोग को 18 पत्र भेजे हैं, लेकिन आयोग ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा कि अभी जो जानकारी दी जा रही है वह शुरुआती है, लेकिन असली खुलासा (हाइड्रोजन बम) आने वाला है, जिसमें पूरी तरह से ठोस सबूत होंगे.

इधर, चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के उन आरोपों को गलत और निराधार बताया. उन्होंने कहा कि मतदाता नामों को ऑनलाइन हटाया नहीं जा सकता और किसी को नाम हटाने से पहले सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है. केवल ऑनलाइन आवेदन करने से किसी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटता. अंतिम निर्णय हमेशा मानव सत्यापन और भौतिक जांच (Physical Verification) के बाद ही लिया जाता है. यानी ऑनलाइन आवेदन तो किया जा सकता है, लेकिन वोट काटने की पूरी प्रक्रिया केवल ऑनलाइन नहीं होती. इसमें आज भी ऑफलाइन प्रक्रिया अपनाई जाती है. आयोग ने यह भी कहा कि आलंद विधानसभा क्षेत्र में हुई कथित नाम कटाई की कोशिशों पर FIR की कार्रवाई हुई है.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी एक बार फिर अपने बयानों और रणनीतियों से राजनीतिक गलियारों में सुर्खियों में हैं. हाल ही में उनके भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट्स में एक नया पैटर्न देखने को मिल रहा है- युवाओं, खासकर Gen Z (1997 के बाद जन्मी पीढ़ी) को सीधे टारगेट करना. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी इस वर्ग के बीच असंतोष और आक्रोश को हवा देकर देश के माहौल को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं.

राहुल गांधी ने बेरोजगारी, महंगाई और सोशल जस्टिस जैसे मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाना शुरू किया है. उनके भाषणों में बार-बार यह बात दोहराई जा रही है कि मौजूदा सरकार ने युवाओं से किए वादे पूरे नहीं किए. लेकिन जिस तरह वे सोशल मीडिया पर छोटे-छोटे वीडियो, मीम्स और आकर्षक स्लोगन का इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे साफ है कि उनकी रणनीति सीधी Gen Z को प्रभावित करने की है.

यह पीढ़ी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सबसे अधिक सक्रिय है और ट्रेंड्स को तेजी से फॉलो करती है. राहुल गांधी इसी कमजोरी को अपनी ताकत में बदलना चाहते हैं. हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर युवाओं से सीधे संवाद की कोशिश की, जहां उन्होंने सरकार की नीतियों को “फेल” बताया और खुद को “विकल्प” के रूप में पेश किया.

हालांकि, बीजेपी का आरोप है कि राहुल गांधी केवल नकारात्मक राजनीति कर रहे हैं और देश के भीतर अशांति फैलाना चाहते हैं. पार्टी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी युवाओं को गुमराह कर उन्हें सरकार और व्यवस्था के खिलाफ भड़काने में लगे हैं. वहीं, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी की यह रणनीति अल्पकालिक फायदा तो दे सकती है, लेकिन इससे देश में अस्थिरता का माहौल भी बन सकता है.

सच यह है कि Gen Z पहली बार लोकतंत्र में बड़ी ताकत के रूप में उभर रही है. यह वर्ग रोजगार, शिक्षा और अवसरों को लेकर बेहद संवेदनशील है. राहुल गांधी इसी भावनात्मक बिंदु पर खेलना चाहते हैं. आने वाले चुनावों में यह देखने वाली बात होगी कि उनकी यह रणनीति युवाओं को वास्तव में आकर्षित करती है या उल्टा उन्हें राजनीति से और दूर कर देती है.

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