Friday, March 6, 2026
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बिहार में फर्जी अस्पताल ले रहे मरीजों की जान, स्वास्थ्य विभाग मौन

Terror of Fake Hospitals in Bihar: बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था की खस्ताहाल स्थिति के बीच एक और गंभीर खतरा तेजी से सामने आ रहा है- फर्जी अस्पताल और नकली डॉक्टरों का कारोबार. ये अस्पताल बिना किसी मान्यता, रजिस्ट्रेशन और प्रशिक्षित डॉक्टरों के खुलेआम मरीजों का इलाज कर रहे हैं. नतीजा यह हो रहा है कि गरीब और अनजान लोग यहां पहुंचकर अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं.

हाल ही में कई जिलों से चौंकाने वाले मामले सामने आए. भोजपुर जिले के आरा शहर में शिवगंज स्थित सिद्धि हॉस्पिटल में एक प्रसूता के ऑपरेशन के समय बच्चेदानी निकालने और गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद काफी हंगामा हुआ. परिजनों ने डॉक्टर्स पर शराब पीकर ऑपरेशन करने का आरोप लगाया. वहीं, डॉक्टर के रूम में बेड के नीचे शराब भी पाई गई. इसी क्रम में परिजनों द्वारा क्लिनिक के एक डॉक्टर की पिटाई भी कर दी गई. इसके बाद भी लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ. गुस्साए परिजनों व स्थानीय लोगों ने शिवगंज, सपना सिनेमा रोड पर टायर जलाकर प्रदर्शन किया. इससे लगभग 6 घंटे तक सड़क जाम रहा.

रोहतास जिले में एक फर्जी डॉक्टर ने गर्भवती महिला का ऑपरेशन वीडियो कॉल पर करवाया, जिससे उसकी मौत हो गई. बगहा (पश्चिम चंपारण) में सास-बहू ने अस्पताल खोलकर न केवल अवैध तरीके से प्रसव कराया, बल्कि प्रसव के दौरान मां और बच्चे की मौत हो गई. पुलिस ने कार्रवाई कर 21 लाख रुपये नकद और शराब की बोतलें बरामद कीं.

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इसी तरह गोपालगंज के सदर अस्पताल में 12 फर्जी नर्सें चार साल तक सरकारी नौकरी का झांसा देकर सेवा देती रहीं और किसी को भनक तक नहीं लगी. वहीं, सीतामढ़ी में डॉक्टर ड्यूटी से नदारद रहे, लेकिन कागजों पर इलाज का दावा करते रहे. ये घटनाएं साबित करती हैं कि सिस्टम की लापरवाही और प्रशासनिक निगरानी की कमी ने फर्जी अस्पतालों और नकली डॉक्टरों को पनपने का मौका दिया है.

फर्जी अस्पतालों का सबसे बड़ा निशाना गरीब तबका बनता है. इलाज के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूली जाती है, जबकि सही इलाज न मिलने से उनकी हालत बिगड़ती जाती है. कई मामलों में मरीज की मौत तक हो जाती है. ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी और सरकारी अस्पतालों की लापरवाही ने इन जालसाजों को और अधिक ताकत दी है.

हालांकि, राज्य सरकार ने हाल ही में एंटी-फ्रॉड यूनिट डैशबोर्ड लॉन्च कर निगरानी बढ़ाने की कोशिश की है, ताकि आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के फर्जी क्लेम रोके जा सकें. लेकिन जब तक जमीनी स्तर पर सख्त कार्रवाई, नियमित निरीक्षण और जनता को जागरूक करने की ठोस पहल नहीं होगी, तब तक ये फर्जी अस्पताल लोगों की जान लेते रहेंगे.

आज जरूरत है कि बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए, ग्रामीण इलाकों में सरकारी अस्पतालों को सक्रिय बनाया जाए और फर्जी अस्पताल चलाने वालों को कड़ी सजा दी जाए. वरना यह मुनाफाखोरी का खेल और मासूमों की जानें लेता रहेगा.

यह भी पढ़ें- बिहार में 2200 साल पुरानी बराबर गुफा: प्राचीन भारत की अद्भुत धरोहर

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