Friday, March 6, 2026
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बिहार में मतदाता सूची में विदेशी नागरिकों के नाम, SIR अभियान में बड़ा खुलासा

Bihar Voter List Revision: बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के दौरान चुनाव आयोग ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) द्वारा किए गए घर-घर सर्वेक्षण में बड़ी संख्या में नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार के नागरिकों के नाम मतदाता सूची में दर्ज पाए गए हैं. ऐसे मामले खासतौर पर सीमांचल इलाके में प्रकाश में आए हैं. चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, घर-घर जाकर जांच के दौरान बूथ स्तर के अधिकारियों को मतदाता सूची में नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार के नागरिकों के नाम मिले, जिनके पास आधार, राशन कार्ड और अन्य दस्तावेज भी थे. आयोग ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की गंभीर खामी बताते हुए ऐसे नामों को सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

एसआईआर अभियान के तहत जिन नागरिकों के नाम 1 अगस्त को जारी होने वाली प्रारंभिक मतदाता सूची में शामिल नहीं होंगे, वे मतदाता पंजीकरण अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी या फिर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष साक्ष्य सहित दावा प्रस्तुत कर सकते हैं. अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 30 सितंबर 2025 को किया जाएगा.

सत्यापन के लिए आवश्यक दस्तावेज
एसआईआर अभियान के तहत नागरिकों को अपनी पहचान व नागरिकता सत्यापित करने के लिए निम्नलिखित प्रमाणपत्रों में से कोई एक या अधिक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे.

1. मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा जारी शैक्षणिक प्रमाण पत्र

2. जाति प्रमाण पत्र

3. राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी)

4. पासपोर्ट

5. राज्य सरकार या स्थानीय निकाय द्वारा जारी पारिवारिक रजिस्टर

6. बैंक, डाकघर या एलआईसी द्वारा 1 जुलाई 1987 से पूर्व जारी कोई दस्तावेज

7. वन अधिकार प्रमाण पत्र

8. सरकारी विभाग में कार्यरत या सेवानिवृत्त कर्मियों का पहचान पत्र

9. स्थायी निवास प्रमाण पत्र

10. सरकार द्वारा जारी भूमि या मकान आवंटन संबंधी दस्तावेज

11. सक्षम प्राधिकार द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र

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चुनाव आयोग का कहना है कि यह अभियान निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और वैधता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है. हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है, जिसमें विपक्ष ने इसे गरीबों और अल्पसंख्यकों को मतदाता सूची से हटाने की साजिश बताया है.

अब सभी की निगाहें 30 सितंबर को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि बिहार के लोकतंत्र में कौन शामिल रहेगा और कौन नहीं.

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यह भी पढ़ें- भारत बंद का सबसे अधिक असर बिहार में, सड़क से रेल तक चक्का जाम

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