Bharat Band Bihar Chakka Jam: भारत बंद का सबसे ज्यादा असर बिहार में देखने को मिला. बिहार में ट्रेड यूनियनों के साथ-साथ वोटर लिस्ट को लेकर भी हड़ताल रही. 9 जुलाई 2025 को बिहार में महागठबंधन की “बिहार बंद-चक्का जाम” की आह्वान पर राज्यव्यापी असर देखा गया, जिसमें रेल सेवाएं बुरी तरह बाधित रहीं, हाईवे और शहरों की सड़कें जाम हो गईं. यह बंद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के विरोध में बुलाया गया था.
ट्रेन सेवा पर बड़ा असर
महागठबंधन समर्थकों ने दरभंगा, पटना, पूर्णिया, जहानाबाद, भोजपुर जैसे जिलों में रेलवे ट्रैकों को अवरुद्ध किया, जिससे दर्जनों पैसेंजर और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द या लेट रहीं.
रेलवे सुरक्षा बल (RPF/GRP) को अत्यधिक सतर्कता बरतनी पड़ी; कई अहम स्टेशनों पर अतिरिक्त पुलिस फोर्स तैनात की गई.

हाईवे और सड़कों पर तनाव
NH‑27, NH‑31, NH‑30 जैसे राष्ट्रीय राजमार्गों पर जगह-जगह चक्का जाम देखा गया.
पटना के शहीद स्मारक, आयकर गोलंबर, कारगिल चौक पर भी बैरिकेडिंग, टायर जलाने और मार्च जैसे विरोध प्रदर्शन हुए.
निजी स्कूल, कॉलेज और स्थानीय बाजारों में भी गतिविधियां प्रभावित रहीं .
राहुल-तेजस्वी का सक्रिय नेतृत्व
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव खुद सड़क पर उतरकर आंदोलन में शामिल हुए. राहुल ने कहा, “बिहार में वोट की चोरी की कोशिश हो रही है.”
तेजस्वी ने कहा, “एनडीए का ‘गोदी आयोग’ लोकतंत्र को बरबाद कर रहा है.”
दोनों नेताओं ने पैदल मार्च शुरू किया और निर्वाचन आयोग के दफ्तरों की ओर उनका काफिला बढ़ा. मार्च के दौरान पुलिस से नोकझोंक भी हुई.
व्यापक राजनीतिक और संगठनात्मक असर
25 करोड़ से अधिक श्रमिक और किसान संगठनों के साथ ट्रेड यूनियनों ने भी भारत बंद में समर्थन दिया, जिससे ये विरोध आंदोलन राष्ट्रीय स्वरूप का प्रतीक बना .
विपक्ष ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि यह SIR प्रक्रिया गरीबों के मताधिकार को छीनने की साजिश है, जिसे ‘NRC जैसी’ बताया गया.

9 जुलाई की ‘बंद’ ने बिहार में सिर्फ यातायात को बाधित नहीं किया, बल्कि राजनीतिक गणित बदलने की इच्छाशक्ति को भी प्रदर्शित किया. राहुल-तेजस्वी की अगुवाई में आए इस प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि महागठबंधन इन मुद्दों को आगामी चुनाव में प्रमुखता से उठाएगा. अब देखना यह है कि चुनाव आयोग, केंद्र और राज्य सरकार इस दबाव का कैसे जवाब देती है.
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