Good News: बिहार सरकार ने राज्यवासियों को एक बड़ी सौगात दी है. छठ, होली, दीपावली, दुर्गा पूजा जैसे प्रमुख पर्वों पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से बड़ी संख्या में बिहारी नागरिक अपने घर लौटते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 299 नई एसी और नॉन एसी बसों का परिचालन करने का निर्णय लिया है, जो विभिन्न अंतर्राज्यीय मार्गों पर बिहार से जुड़े जिलों तक चलेंगी.
बेहतर सुविधा, सुरक्षित यात्रा
त्योहारों के दौरान ट्रेनों और प्राइवेट वाहनों में बढ़ती भीड़ व महंगे किराये के कारण आम यात्री, विशेष रूप से प्रवासी मजदूर और छात्र भारी परेशानी झेलते हैं. इन हालात को देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है कि अब राज्य परिवहन निगम के माध्यम से कम किराये में सुरक्षित, सुलभ और आरामदायक यात्रा सुविधा दी जाएगी.
बिहार के लोग विभिन्न पर्व-त्योहारों खासकर छठ, होली, दीपावली एवं दुर्गा पूजा के अवसर पर काफी संख्या में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और पश्चिम बंगाल से घर आते हैं। पर्व-त्योहारों के अवसर पर बिहार आने में लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बिहार आने वाले लोगों…
— Nitish Kumar (@NitishKumar) June 26, 2025
किन मार्गों पर चलेंगी बसें?
299 नई बसों का संचालन निम्न राज्यों से बिहार के लिए किया जाएगा.
दिल्ली से पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, गया.
लखनऊ, बनारस, गोरखपुर से सीमांचल और मिथिलांचल के शहर.
चंडीगढ़ और अमृतसर से बिहार के उत्तरी जिलों तक.
कोलकाता से भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार आदि तक.
इन बसों से छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों तक भी पहुंच संभव होगी.

सुविधाएं और किराया
ये बसें दो श्रेणियों में चलेंगी- एसी और नॉन एसी. बसों में होंगी ये सुविधाएं.
आरामदायक सीटें और पर्याप्त लेग स्पेस.
मोबाइल चार्जिंग पोर्ट.
सीसीटीवी निगरानी व जीपीएस ट्रैकिंग.
महिला यात्रियों के लिए सुरक्षित सीटें.
ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा.
किराया सामान्य बाजार दरों की तुलना में 30-40% सस्ता होगा.
रोजगार और संचालन मॉडल
राज्य सरकार 75 वातानुकूलित और 74 डीलक्स बसों की खरीद पर 105.82 करोड़ रुपए खर्च करेगी. साथ ही लोक निजी भागीदारी ((PPP Model) के अंतर्गत भी 150 अतिरिक्त एसी बसों का परिचालन कराया जाएगा. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. ड्राइवर, कंडक्टर, मैकेनिक आदि के लिए भर्तियों की प्रक्रिया शुरू हो गई है.

बिहार सरकार का यह कदम न सिर्फ प्रवासियों को त्योहारों में घर लौटने में राहत देगा, बल्कि परिवहन व्यवस्था को अधिक संगठित, आधुनिक और भरोसेमंद बनाएगा. यह पहल सामाजिक जुड़ाव को सशक्त बनाते हुए बिहार की छवि को भी सुदृढ़ करेगी.
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