Bihar Teacher Recruitment Scam: बिहार में कितने शिक्षकों की नियुक्ति अवैध तरीके से यानी सेटिंग-गेटिंग के जरिए हुई है, इसकी जानकारी विभाग के अलावा स्थानीय अधिकारियों को भी नहीं है. इन अवैध शिक्षकों की संख्या काफी बड़ी है, जो समय-समय पर उजागर होती रहती है. हाल ही में शिक्षा विभाग ने इसी मामले में बड़ी कार्रवाई की है और सीतामढ़ी जिले में 30 प्रखंड शिक्षकों की नौकरी चली गई. इससे पूर्व, 100 से अधिक अवैध रूप से / फर्जी तरीके से नियुक्त नियोजित शिक्षकों की जांच के बाद, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें नौकरी से हटाया जा चुका है.
हाल ही में बहुचर्चित शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश सुनील कुमार सिंह की अदालत ने बांका जिले के पूर्व प्राथमिक विद्यालय शिक्षक मंडेश्वर भगत को दो वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई. इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर 40 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है. सीबीआई जांच में पता चला कि मंडेश्वर भगत ने न सिर्फ खुद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की थी, बल्कि अपने कई रिश्तेदारों की अवैध नियुक्ति में भी सक्रिय भूमिका निभाई.
बिहार के सरकारी स्कूलों में बड़े पैमाने पर शिक्षकों की भर्ती की जा रही है, लेकिन अब तक हजारों ऐसे शिक्षक जांच के घेरे में आ चुके हैं, जिनके पास जरूरी योग्यता नहीं थी या जिनके दस्तावेज फर्जी थे और वे शुरुआती दौर में ही बीपीएससी की प्रक्रिया पार करने में कामयाब हो गए. पिछले साल नवंबर में करीब 24 हजार शिक्षकों की फर्जी नियुक्ति का मामला सामने आया था. बताया गया था कि CTET में फेल हुए कई अभ्यर्थी भी शिक्षक पद पर बहाल हो गए थे. बिहार में तो कई ऐसे अभ्यर्थी भी पकड़े गए जो सक्षमता परीक्षा में पास हो गए थे, लेकिन काउंसलिंग के दौरान कई शिक्षकों की मार्कशीट फर्जी पाई गई, जिनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई.
बीपीएससी ने तीसरे चरण की शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़ा करने वाले 68 अभ्यर्थियों पर परमानेंट बैन लगा दिया, जिनकी जगह अन्य व्यक्ति TRE-3 परीक्षा में शामिल हुए. जांच में पता चला कि उन 68 उम्मीदवारों ने परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन उनकी जगह दूसरे लोगों ने परीक्षा दी थी.

बिहार में शिक्षक भर्ती से जुड़े घोटालों की परतें खुलने के साथ एक नई चिंताजनक बात सामने आई है कि अभिभावकों को झांसे में लेने वाले गिरोह भी सक्रिय हैं. अभिभावकों को भी इन गिरोहों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है. ये संगठित ठग समूह सिर्फ उम्मीदवारों को नहीं, बल्कि उनके माता-पिता और परिवारजनों को झांसे में लेकर ठगी का जाल फैलाते हैं. आइए जानते हैं कि ये गिरोह किन तरीकों से अभिभावकों को फंसाते हैं.
फर्जी ‘भीतर के आदमी’ का भरोसा दिलाना
गिरोह के सदस्य खुद को BPSC, शिक्षा विभाग या जिला शिक्षा कार्यालय में कार्यरत बताकर अंदर से संपर्क होने का दावा करते हैं. वे यह कहकर अभिभावकों को फंसाते हैं कि बस थोड़ा सहयोग करिए, आपके बच्चे का चयन पक्का है. यह सहयोग अक्सर 3 से 5 लाख रुपये तक की घूस या प्रोसेसिंग फीस के नाम पर मांगा जाता है. अभिभावक को यह विश्वास दिलाया जाता है कि आपके बच्चे को बस भर्ती परीक्षा में शामिल होना है और रिजल्ट निकलवाने की जिम्मेदारी हमारी है. कई गिरोह तो जाली दस्तावेज बनवा कर उम्मीदवार को रिक्रूटमेंट एग्जाम दिलवा देते हैं और इसके बाद रिजल्ट निकलवाने के नाम पर अभिभावक से मोटी रकम की ठगी कर लेते हैं.
फर्जी कॉल और व्हाट्सएप चैट
गिरोह का सदस्य फर्जी मोबाइल नंबरों से कॉल कर खुद को BPSC अधिकारी या वरीय चयन पदाधिकारी बताता है. साथ ही व्हाट्सएप पर फर्जी नियुक्ति पत्र, मेरिट लिस्ट और पहचान पत्र भेजकर अभिभावकों का भरोसा जीतता है.
भावनात्मक दोहन: बेटे / बेटी के भविष्य की चिंता
गिरोह विशेष रूप से मध्यमवर्गीय और ग्रामीण परिवारों को निशाना बनाते हैं, जहां नौकरी की उम्मीद घर की सबसे बड़ी आशा होती है. वे कहते हैं- “सरकारी नौकरी एक बार मिल गई तो जिंदगी सुधर जाएगी, अभी मौका है.” इस भावनात्मक कमजोरी का फायदा उठाकर पैसे ऐंठ लिए जाते हैं.
फर्जी नियुक्ति पत्र
कुछ मामलों में गिरोह नकली जॉइनिंग लेटर तक थमा देते हैं. जब अभिभावक अपने बच्चे को लेकर स्कूल पहुंचते हैं, तब उन्हें सच्चाई का पता चलता है.

अभिभावकों को झांसे में लेने वाले गिरोह शिक्षा व्यवस्था में एक गंभीर विकृति हैं. सरकार और जांच एजेंसियां भले सतर्क हैं, लेकिन अभिभावकों की सजगता और जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है. सरकारी नौकरी केवल कड़ी मेहनत और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली से ही संभव है, किसी शॉर्टकट का वादा महज एक जाल हो सकता है.
अभिभावकों को यह समझ लेना होगा कि पैसा लेकर नौकरी दिलाने का दावा झूठा है. BPSC की चयन प्रक्रिया पूरी तरह मेरिट आधारित होती है. अभिभावकों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि यदि सेटिंग करके किसी तरह से आपके बच्चे को नौकरी मिल भी जाए तो आगे चलकर उन्हें कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में, कोई भी संदिग्ध व्यक्ति या संस्था घूस लेकर नौकरी दिलाने का वादा करे तो तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस या EOU (आर्थिक अपराध इकाई) को दें.
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