Bihar Electricity: बिहार में बिजली संकट की समस्या अब अतीत की बात होती जा रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिससे बिजली आपूर्ति में सुधार हुआ है और उपभोक्ताओं को राहत मिली है.
बिजली दरों में कमी और किसानों को राहत
राज्य सरकार ने बिजली दरों में 15 पैसे प्रति यूनिट की कमी की है, जिससे आम उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिला है. किसानों के लिए सिंचाई की बिजली दर मात्र 55 पैसे प्रति यूनिट निर्धारित की गई है, जिससे डीजल पंप की तुलना में 10 गुना सस्ती सिंचाई संभव हो रही है.
बिजली उत्पादन और वितरण में सुधार
बिहार में बिजली उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं. बाढ़ ताप विद्युत परियोजना की 660 मेगावाट क्षमता की एक नई इकाई इस वर्ष से उत्पादन शुरू करेगी, जबकि बक्सर (चौसा) में 1320 मेगावाट की ताप विद्युत परियोजना 2025-26 में क्रियान्वित होगी. भागलपुर के पीरपैंती में 2400 मेगावाट की ताप विद्युत परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है, जिससे यह राज्य की सबसे बड़ी निजी निवेश वाली परियोजना बनेगी.
स्मार्ट मीटर और राजस्व संग्रहण में वृद्धि
बिहार स्मार्ट प्री-पेड मीटर अधिष्ठापन में देश में अग्रणी है. अब तक 62 लाख से अधिक स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाए जा चुके हैं, जिससे उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत पर अधिक नियंत्रण मिल रहा है. इससे राज्य सरकार के राजस्व संग्रहण में भी वृद्धि हुई है.

अक्षय ऊर्जा में निवेश
राज्य सरकार ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भी कदम बढ़ाए हैं. जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत अब तक 11383 सरकारी भवनों पर 100 मेगावाट और 5683 निजी भवनों पर 21 मेगावाट के रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाए गए हैं. राज्य में विभिन्न सौर परियोजनाओं के माध्यम से 178 मेगावाट से अधिक बिजली का उत्पादन किया जा रहा है.
बिहार सरकार के इन प्रयासों से राज्य में बिजली की उपलब्धता में सुधार हुआ है और उपभोक्ताओं को राहत मिली है. इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से उम्मीद है कि बिहार में बिजली की किल्लत अब इतिहास बन जाएगी और हर घर रोशन होगा.

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