Hapur Gas Cylinders Black Marketing: उत्तर प्रदेश के हापुड़ से एक दिलचस्प मामला सामने आया है, जहां ‘जनसेवा’ का एक अनोखा और हैरान कर देने वाला रूप देखने को मिला. यहां पुलिस ने एक सपा नेता के घर से पूरे 55 गैस सिलेंडर बरामद किए हैं. आम आदमी महीनों तक बुकिंग के बाद भी सिलेंडर का इंतजार करता रहे, लेकिन नेताजी ने शायद सोचा होगा कि जनता की परेशानी को करीब से समझने के लिए पहले सिलेंडर अपने घर में इकट्ठा कर लेना चाहिए.
बताया जा रहा है कि पुलिस को सूचना मिली थी कि इलाके में रसोई गैस की कालाबाजारी हो रही है. जांच-पड़ताल शुरू हुई तो रास्ता सीधे नेताजी के घर तक जा पहुंचा. जब दरवाजा खुला और अंदर झांका गया तो ऐसा नजारा था मानो कोई छोटा-मोटा गैस एजेंसी का गोदाम ही खुल गया हो. एक-दो नहीं, पूरे 55 सिलेंडर कतार में खड़े थे, जैसे चुनावी रैली में कार्यकर्ता खड़े रहते हैं.
‘जनसेवा’ का नया मॉडल?
राजनीति में जनसेवा के कई मॉडल देखे गए हैं, किसी ने सड़क बनवाई, किसी ने अस्पताल खुलवाया. लेकिन हापुड़ में जनसेवा का एक नया मॉडल सामने आया है- “पहले सिलेंडर जमा करो, फिर सेवा का मौका देखो.” हो सकता है नेताजी का तर्क भी तैयार हो कि वे तो जनता की परेशानी दूर करने के लिए सिलेंडर ‘स्टॉक’ करके रखे हुए थे. जब जनता को जरूरत पड़ेगी, तब ‘नेताजी गैस सेवा केंद्र’ से मदद मिल जाएगी.
जनता लाइन में, सिलेंडर घर में
विडंबना यह है कि देश में अक्सर लोग गैस सिलेंडर के लिए एजेंसी के चक्कर काटते रहते हैं. कई जगहों पर देर से डिलीवरी की शिकायतें भी आती रहती हैं. ऐसे में, अगर किसी नेता के घर से एक साथ 55 सिलेंडर निकल आएं, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर यह सुविधा आम लोगों को क्यों नहीं मिलती? आम आदमी अगर एक अतिरिक्त सिलेंडर भी रख ले तो एजेंसी और नियमों का डर सता जाता है, लेकिन नेताजी के यहां तो पूरा ‘सिलेंडर सम्मेलन’ चल रहा था और किसी को भनक तक नहीं लगी.
सपा कनेक्शन पर बढ़ी सियासी हलचल
इस मामले में स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि आरोपी अब्दुल रेहान समाजवादी पार्टी का नेता है. हालांकि, सपा जिलाध्यक्ष ने इस दावे का खंडन किया है. हापुड़ सपा जिलाध्यक्ष आनंद गुर्जर ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि अब्दुल रेहान न तो वर्तमान में समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ता है और न ही अतीत में कभी उसका पार्टी से कोई संबंध रहा है. फिलहाल आरोपी अब्दुल फरार बताया जा रहा है.
राजनीति और ‘गैस’ का रिश्ता
भारतीय राजनीति में ‘गैस’ का रिश्ता नया नहीं है. चुनाव के समय नेताओं के भाषणों में भी खूब गैस निकलती है- विकास के वादों की, योजनाओं की और जनहित की. फर्क बस इतना है कि हापुड़ वाले मामले में यह गैस सिलेंडर के रूप में पकड़ में आ गई.
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि इतने सिलेंडर आखिर नेताजी के घर तक पहुंचे कैसे. लेकिन जनता को इस पूरे मामले से एक सीख जरूर मिल गई है कि राजनीति में अगर कुछ भी ज्यादा दिखे, तो समझ लीजिए वहां ‘स्टॉक’ जरूर है, चाहे वह वादों का हो या सिलेंडरों का.
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